महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह बनाकर बदली किस्मत:देसी बाजरे के कुकीज को ब्रांड बनाया अब ब्रिटेन और अमेरिका तक डिमांड

जिले के आदर्श ढूंढा गांव की 10 महिलाओं ने जीजी बाई स्वयं सहायता समूह बनाकर न सिर्फ अपनी किस्मत बदली है, बल्कि थार के पारंपरिक अनाज (बाजरे) को सात समंदर पार पहुंचा दिया है। ग्रामीण महिलाएं आज बाजरे (मिलेट) के बिस्कुट बनाकर लाखों रुपए कमा रही हैं। इनके बनाए कुकीज आज लंदन के कैफे से लेकर अमेरिका और जापान के बाजारों तक महक बिखेर रहे हैं। महिला समूह को हाई-टेक क्यूआर कोड पैकेजिंग के जरिए ऑनलाइन ऑर्डर मिल रहे हैं। केयर्न के प्रोजेक्ट में मिला प्रशिक्षण, फिर शुरू किया काम 16 मई 2024 को केयर्न ऑयल एंड गैस के बाड़मेर उन्नति प्रोजेक्ट के सहयोग से महिलाओं ने प्रशिक्षण शुरू किया। शुरूआत में चुनौतियां कम नहीं थीं। इन महिलाओं के पास न ओवन था, न मिक्सर और न ही मार्केटिंग का कोई ज्ञान। महिलाओं को तीन दिन की ट्रेनिंग दी गई। इन्हें हाइजीन, बेकिंग, पैकेजिंग और क्यूआर कोड आधारित मार्केटिंग की ट्रेनिंग दी गई। समूह की हेमलता, धुड़ी, पुष्पा, लक्ष्मी, मीरा, कमला, निरमा, संगीता, सुशीला, प्रिया की टीम ने घर के शुद्ध घी, गुड़, इलायची, जीरा और ड्राई फ्रूट्स के साथ बाजरे के ग्लूटेन-फ्री कुकीज तैयार किए। इनमें किसी भी तरह के आर्टिफिशियल कलर या प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल नहीं किया जाता। एक साल से भी कम समय में 150 किलो से ज्यादा कुकीज की बिक्री हुई, इससे समूह को 3 लाख रुपए से अधिक की कमाई हुई।

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