करनाल जिले के बसताड़ा टोल प्लाजा पर दिल्ली के जंतर-मंतर जा रहे पंजाब के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों को हरियाणा पुलिस ने रोक दिया। यूजीसी एक्ट को रोल बैक करने की मांग को लेकर पंजाब से दिल्ली जा रहे प्रदर्शनकारियों की बस को करीब डेढ़ घंटे तक टोल प्लाजा पर खड़ा रखा गया। प्रदर्शनकारी दिल्ली जाने की जिद पर अड़े रहे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी और आखिरकार बस को वापस पंजाब की ओर लौटा दिया। डेढ़ घंटे तक बस रोकी, आगे जाने नहीं दिया जानकारी के अनुसार, रविवार को जनरल कैटेगरी वेलफेयर फेडरेशन पंजाब और पीपीसीसी/एमपीसीसी के पदाधिकारी और उम्मीदवार दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देने जा रहे थे। जैसे ही उनकी बस करनाल के बसताड़ा टोल प्लाजा पर पहुंची तो हरियाणा पुलिस ने उसे रोक लिया। करीब डेढ़ घंटे तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत और जद्दोजहद चलती रही। पदाधिकारी दिल्ली जाने की मांग पर अड़े रहे, लेकिन पुलिस ने किसी को आगे नहीं जाने दिया। शांतिपूर्ण तरीके से जा रहे थे दिल्ली: कुलजीत सिंह जनरल कैटेगरी वेलफेयर फेडरेशन पंजाब के प्रधान कुलजीत सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे यूजीसी एक्ट के विरोध में शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर पर धरना देने जा रहे थे। उन्होंने बताया कि पूरे देश के अलग-अलग राज्यों से लोग वहां पहुंच रहे थे और वे भी पंजाब से दिल्ली जा रहे थे, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। उन्होंने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। यूपीएससी भर्ती 2026 के नए नियमों का विरोध कुलजीत सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने यूपीएससी भर्ती 2026 में जो बदलाव किए हैं, वे सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के साथ बड़ा अन्याय हैं। उन्होंने कहा कि इन नए नियमों से सामान्य वर्ग के युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा। विद्यार्थियों ने लंबे समय तक मेहनत करके परीक्षा की तैयारी की है और अचानक नियम बदलने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा। मेरिट के आधार पर भर्ती की मांग उन्होंने कहा कि, भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह मेरिट के आधार पर होनी चाहिए। नए नियमों के कारण पारदर्शिता और समान अवसर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को सभी वर्गों के विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। अंबाला बॉर्डर पर करेंगे प्रदर्शन कुलजीत सिंह ने कहा कि जब उन्हें दिल्ली जाने से रोक दिया गया है तो अब वे अंबाला से आगे पंजाब के बॉर्डर पर हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे और नारेबाजी करेंगे, ताकि उनकी आवाज सरकार तक पहुंच सके। फैसला वापस नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया तो सामान्य वर्ग के विद्यार्थी और संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि यह लड़ाई विद्यार्थियों के अधिकारों की है और जब तक सरकार यह फैसला वापस नहीं लेती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो पंजाब में बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे।


