कांग्रेस को हरियाणा राज्यसभा चुनाव में भीतरघात का डर:वोटिंग के दिन तक विधायक दूसरी स्टेट में शिफ्ट होंगे, हिमाचल फर्स्ट चॉइस

कांग्रेस पार्टी को हरियाणा में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भीतरघात का डर सता रहा है। दिल्ली में बैठे पार्टी के थिंक टैंक ने हालात को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व को सलाह दी है कि वोटिग तक हरियाणा से कांग्रेस विधायकों को पार्टी शासित किसी दूसरे राज्य में शिफ्ट कर दिया जाए। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद कई वरिष्ठ विधायकों से उनकी पसंद के राज्य के बारे में पूछा गया है। विधायकों ने हिमाचल प्रदेश को अपनी पहली पसंद बताया है। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला आलाकमान ही लेगा। अगर कांग्रेस ने अपने विधायकों को स्टेट से बाहर शिफ्ट किया तो वह विधानसभा के मौजूदा बजट सेशन से एक-आध दिन दूर रह सकते हैं। हरियाणा से राज्यसभा की दोनों सीटों के लिए 16 मार्च को वोटिंग होगी। भाजपा ने संजय भाटिया और कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को अपना उम्मीदवार बनाया है जबकि भाजपा नेता सतीश नांदल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया है। नजदीक होने के कारण हिमाचल पहली चॉइस देश में कांग्रेस की 3 राज्यों में बहुमत वाली सरकारें हैं- हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना। हिमाचल के अधिकांश पर्यटक स्थल हरियाणा के काफी नजदीक हैं, इसलिए कम दूरी और आने-जाने में आसानी पहली पसंद है। वहीं, हरियाणा से कर्नाटक की दूरी 1918 किलोमीटर है, जहां सड़क मार्ग से पहुंचने में कम से कम 31 घंटे का समय लगेगा। तेलंगाना का भी यही हाल है। हरियाणा से तेलंगाना की दूरी 1,709 किलोमीटर है, और इस राज्य तक सड़क मार्ग से पहुंचने में करीब 28 घंटे लगेंगे। जबकि हिमाचल में कुछ ही घंटों में पहुंचा जा सकता है। यह चंडीगढ़ से बिल्कुल नजदीक है। आइए जानते हैं कांग्रेस को भीतरघात का डर क्यों… 1. क्रॉस वोटिंग पहली वजह हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। कांग्रेस के उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौद्ध को जीतने के लिए 31 कोटा वोटों की जरूरत है। हालांकि निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर सतीश नांदल चुनाव लड़ रहे हैं और जिन्हें कथित तौर पर बीजेपी का समर्थन मिला हुआ है। नांदल क्रॉस वोटिंग पर निर्भर हैं। ऐसे में कांग्रेस नहीं चाहती कि चुनाव में ऐसी कोई संभावना बने। 2. अयोग्य घोषित नहीं कर सकते राज्यसभा चुनाव में ओपन वोटिंग होती है। इसका सीधा मतलब है कि विधायकों को क्रॉस वोटिंग करने पर विधानसभा से अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता। कुलदीप नैयर बनाम भारत संघ मामले का हवाला देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि राज्यसभा के चुनाव में ओपन वोटिंग से वोटर के अभिव्यक्ति के अधिकार पर पड़ने वाले प्रभाव का तर्क मान्य नहीं है, क्योंकि निर्वाचित विधायक को किसी विशेष तरीके से मतदान करने पर सदन की सदस्यता से अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा। ज्यादा से ज्यादा उसके राजनीतिक दल द्वारा उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। 3. संख्या बल होने के बावजूद हार का इतिहास हरियाणा में 2022 में हुए राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस के अजय माकन की हार हुई थी। उस समय कांग्रेस ने दलबदल रोकने के लिए अपने विधायकों को छत्तीसगढ़ भेजा था। पार्टी ने आरोप लगाया था कि कुलदीप बिश्नोई ने क्रॉस वोटिंग की थी, जबकि एक अमान्य वोट किरण चौधरी से जुड़ा था। वहीं, 2016 के हरियाणा राज्यसभा चुनाव में स्याही कांड के दौरान एक झटका लगा था, जब अलग-अलग स्याही से चिह्नित 12 वोटों को अमान्य घोषित कर दिया गया था, जिसके बाद कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार आरके आनंद हार गए थे। 4. पार्टी के अंदर गुटबाजी हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से गुटीय राजनीति की चर्चा रही है। ऐसे में हाईकमान को डर है कि असंतुष्ट विधायक मौका मिलने पर भीतरघात कर सकते हैं। इसलिए उन्हें एक जगह रखकर पार्टी लाइन में वोटिंग सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई जा रही है। केंद्रीय नेतृत्व ने हिदायत भी दी है कि यदि कोई भी विधायक क्रॉस वोटिंग या वोट को अमान्य करने की प्रक्रिया में लिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा सेशन से दूरी बना सकते हैं कांग्रेस पार्टी के सूत्रों के अनुसार, हरियाणा कांग्रेस के इंचार्ज बीके हरिप्रसाद सोमवार (9 मार्च) को विधायकों के साथ जुड़ेंगे, जिसके बाद इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पार्टी के एक सीनियर विधायक ने बताया कि इस दौरान कुछ विधायक सेशन की कार्यवाही से भी दूर रहेंगे। उन्हें 16 मार्च को मतदान के दिन वापस लाया जाएगा। उनका कहां रखा जाएगा ये फैसला भी सोमवार को ही होगा। ——————————– ये खबर भी पढ़ें :- हरियाणा राज्यसभा चुनाव में इनेलो के स्टैंड पर सस्पेंस:इस बार INLD छोड़कर गए नेता निर्दलीय उम्मीदवार, पॉलिटिकल अफेयर्स की मीटिंग में फैसला होगा हरियाणा में 2 सीटों के लिए होने वाले राज्यसभा चुनाव में अभी 10 दिन बचे हैं। भाजपा से संजय भाटिया, कांग्रेस से कर्मवीर बौद्ध और निर्दलीय सतीश नांदल मैदान में हैं। 3 निर्दलीय विधायकों और कुछ भाजपा विधायकों ने निर्दलीय उम्मीदवार नांदल को अपना समर्थन दे दिया है, जबकि इनेलो का अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे किस तरफ वोट करेंगे। पढ़ें पूरी खबर….

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