भास्कर न्यूज|लोहरदगा जिला के खखपरता धाम, अखिलेश्वर धाम, स्वयंभू महादेव मंदिर, महादेव मंडा सहित अन्य शिवालयों में 30 जुलाई से श्रावण मास के शुभारंभ के साथ धार्मिक आयोजनों की धूम रहेगी। इसी के तहत दैनिक भास्कर प्रतिनिधि द्वारा 11वीं सदी के सदर प्रखंड स्थित खकपरता धाम पर विशेष जानकारी ली गई। लोगों का मानना है कि यह धाम खुद में विशेष है क्योंकि भगवान विश्वकर्मा ने खुद उक्त मंदिर का निर्माण करवाया था। तब 11वीं सदी में यह धाम शिव आराधना का बड़ा केंद्र था। कई वर्ष पूर्व में खखपरता धाम की जांच में पहुंचे रांची विश्वविद्यालय के पूर्व लेक्चरर व पुरातत्व विभाग कला संस्कृति के पूर्व डायरेक्टर हरेंद्र प्रसाद सिन्हा ने बताया की खखपरता धाम के रिसर्च से यह बात सामने आ चुकी कि यह धाम 11वीं सदी में शिव आराधना का बहुत बड़ा केंद्र था। मंदिर के पत्थर ओिडशा शैली से निर्माण कराए गए हैं। साथ ही इस तरह के पत्थर व डिजाइन का प्रयोग आज से 1000 वर्ष पहले 10वीं व 11वीं सदी में देखी जाती थी। लोगों ने बताया कि मंदिर प्राचीन होने के साथ बड़े इतिहास से भी जुड़ा है। भगवान विश्वकर्मा द्वारा मंदिर बनवाने के बाद निरंतर पूजा अर्चना भी की जाती थी। मंदिर के नीचे एक गुफा भी थी। जो समय के साथ बंद हो गई, परंतु उसके द्वार को आज भी देखा जा सकता है। कहा जाता है कि तब इसी गुफा मार्ग के माध्यम से सैनिक दूर दराजों तक गुप्त रूप से आना-जाना करते थे। इसके अलावा महाशिवरात्रि के मौके पर इन शिवालयों के अलावा सभी छोटे बड़े और नए व पुराने शिवालयों में शिव आस्था की बयार बहती है। खास तौर से खखपरता धाम, अखिलेश्वर धाम, महादेव मंडा, बुढ़वा महादेव, स्वयंभू महादेव, शिवाला मंदिर, पुलिस लाईन स्थित शिव मंदिर, शंख नदी स्थित शिव मंदिर, बक्सी डीपा शिव मंदिर, श्रीश्री दुर्गा बाड़ी शिव मंदिर, कोराम्बे महाप्रभु मंदिर, सदर थाना परिसर शिव मंदिर, श्रीराम मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर, महाराजा अग्रसेन पथ स्थित शिव मंदिर, ठाकुरबाड़ी स्थित शिव मंदिर आदि में शिवभक्तों का सैलाब उमड़ता है। 30 जुलाई से श्रावण मास का शुभारंभ होगा। जिसे लेकर अलग-अलग समितियां द्वारा अलग-अलग धार्मिक आयोजनों को लेकर तैयारियां करते देखा जा रहा है। महादेव छत्तरबगीचा स्थित निर्माणाधीन स्वयंभू महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग लगभग हजार साल पुराना माना गया है। मंदिर परिसर के निकट से ही कुआं खुदाई के दौरान 20 अप्रैल 2011 को स्वयंभू महादेव मिले थे। जिन्हें 15 मई 2012 को वर्तमान निर्माणाधीन मंदिर परिसर में क्रेन से उठाकर शिफ्ट किया गया था। अभी यहां सवा करोड़ से अधिक की लागत का उड़ीसा स्टाइल का मंदिर निर्माण कार्य जारी है। कुडू प्रखंड के चांपी स्थित ऐतिहासिक महादेव मंडा शिव मंदिर भी यहां सबसे बड़ा शिव भक्ति का केंद्र है। इसके अलावा तान तुकू पहाड़ी पर हजार फीट की ऊंचाई में स्थित गुफा में स्वयंभू महादेव मंदिर में भी हजारों की संख्या में शिव भक्त आते हैं। 11वीं शताब्दी में बना भंडरा प्रखंड का अखिलेश्वर धाम शिव भक्ति का बड़ा केंद्र है। आज भी यह मंदिर भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था और श्रद्धा की मिसाल है। यह झारखंड के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है।


