भास्कर न्यूज| महासमुंद महिला पुलिस अधिकारी सिर्फ वर्दी नहीं पहनतीं, बल्कि ज़िम्मेदारी और कर्तव्य की मिसाल पेश करती हैं। महासमुंद की ये सशक्त महिलाएं अपराध नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा, नशा मुक्ति, और युवाओं को मार्गदर्शन देने जैसे क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य कर रही हैं। महिला दिवस पर इन निडर और समर्पित महिला अधिकारियों को सलाम, जो जिले की कानून व्यवस्था और सुरक्षा की रीढ़ बनी हुई हैं। न केवल परिवार, बल्कि अपराध और कानून व्यवस्था भी इन महिला अधिकारियों की सख्त निगरानी में है। समाज को दिशा देने और विकास के लिए महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। महासमुंद जिले में भी सुरक्षा की कमान महिला पुलिस अधिकारियों के हाथों में है। ये महिलाएं न सिर्फ अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा रही हैं, बल्कि जिले में अपराध, चोरी, गांजा तस्करी, शराब बिक्री, जुआ और सुरक्षा व्यवस्था को भी बखूबी संभाल रही हैं। जिससे यह महिलाएं समाज में एक विशेष स्थान बनाई हुई हैं व लोगों के लिए प्रेरणादायक बनी हुई है। महासमुंद जिले में एडिशनल एसपी प्रतिभा पांडेय जिले की कमान संभाल रही हैं। उनके अंतर्गत 13 थाने और 4 चौकियां आती हैं। हाल ही में हुए त्रिस्तरीय पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी ज़िम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर थी। इसके अलावा वे कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सवा तीन दंतेवाड़ा में सेवाएं दी है। जशपुर में नक्सली पकड़ने और गोला बारुद बरामद करने में महत्वपूर्ण भूमिका रही। डीएसपी सारिका वैद्य वर्तमान में बाल अपराध से संबंधित मामलों को देख रही हैं। उन्होंने अब तक 44 मामलों में दूसरे राज्यों से बालिकाओं को बरामद किया है। एससी-एसटी के लिए बेहतर कार्य करने पर उन्हें मुख्यमंत्री के हाथों गुरु घासीदास पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। महासमुंद जिला ओडिशा की सीमा से सटा होने के कारण गांजा तस्करी का मुख्य रास्ता माना जाता है। इसे रोकने के लिए 6 महीने पहले एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स टीम का गठन किया गया, जिसकी प्रभारी डीएसपी प्रतिभा चंद्रा को बनाया गया। महज 3 महीनों में ही उन्होंने 18 मामलों में 419 किलो गांजा ज़ब्त किया, जिसकी कीमत 69.23 लाख रुपये थी। उनके नेतृत्व में गांजा तस्करों पर कड़ी कार्यवाही की गई है।


