फाइट सीक्वेंस के बीच अमिताभ ने गलती से गाली दी:डायरेक्टर-राइटर विक्रम भट्ट ने शेयर किया फिल्म अग्निपथ से जुड़ा किस्सा

डायरेक्टर और राइटर विक्रम भट्ट ने हाल ही में अमिताभ बच्चन को लेकर किस्सा शेयर किया। उन्होंने कहा कि अमिताभ बच्चन ने फिल्म अग्निपथ के टाइम पर गाली दी थी और फिर कहा था कि उस गाली को हटा दिया जाना चाहिए। ‘फाइट सीक्वेंस के बीच अमिताभ ने गलती से गाली दी’ रेडियो नशा से बातचीत में विक्रम ने फिल्म के एक फाइट सीक्वेंस को याद किया। उन्होंने बताया कि फिल्म के इस फाइट सीन में अमिताभ को विलेन को बार-बार मुक्का मारना था। इस समय उनके पास खड़े कलाकारों को उन्हें रोकना था क्योंकि जिस किरदार को वह मुक्का मार रहे थे, वह पहले ही मर चुका था। विक्रम भट्ट ने शेयर किया किस्सा विक्रम भट्ट ने कहा- ‘उस समय एक ही समय में तीन कैमरे चल रहे थे और पुराने समय में कैमरे बहुत तेज आवाज किया करते थे। लेकिन अमित जी शॉट में इतने मशगूल थे कि उन्होंने गलती से शॉट में गाली दे दी। और फिल्म के डायरेक्टर मुकुल ने शॉट को ओके कर दिया। अमित जी के पास जो लोग खड़े थे वो भी उनके मुहं से गाली सुनकर चौंक गए थे।’ डायरेक्टर से सीन हटाने की रिक्वेस्ट की विक्रम ने कहा कि अमिताभ एक सभ्य और अच्छा बोलने वाले आदमी हैं। लेकिन उस टाइम वो उस मूमेंट में थे, तो उन्होंने गाली दी। बाद में विक्रम फिल्म के डायरेक्टर मुकुल के पास गए और उन्हें इस सीन को दिखाने के लिए मना किया। डायरेक्टर ने कहा कि वे इसे बाद में डब कर देंगे। गलती से सीन से गाली हटाना भूल गया- विक्रम विक्रम ने कहा- सीन को शूट करने के बाद एक ट्रायल शो था। ट्रायल शो म्यूजिक के साथ होता है। आज ऐसा करना आसान है, लेकिन तब यह सब मुश्किल था। तो मेरे पास अमित जी का कॉल आया और उन्होंने कहा कि मेरी फैमिली भी देखने आ रही है इसलिए आप वह हिस्सा हटा दें जहां मैंने गाली दी है। लेकिन मेरे पास काफी काम था और मैं भूल गया। विक्रम ने कहा कि जैसे ही ट्रायल में वो सीन स्क्रीन पर आया तो उन्हें याद आया कि वह उसे हटाना भूल गए। इतने में उन्होंने अमिताभ की तेज आवाज सुनी, एक्टर ने कहा- विक्की, यू आर फायरड। साल 2004 में फिल्म ऐतबार में विक्रम-अमिताभ ने साथ काम किया इसके बाद साल 2004 में विक्रम और अमिताभ ने साथ काम किया। फिल्म ऐतबार में विक्रम ने अमिताभ बच्चन के साथ काम किया। इस टाइम का किस्सा शेयर करते हुए उन्होंने कहा- अमित जी के साथ काम करना ऑटोमैटिक कार में बैठने जैसा है, आपको कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। वह बहुत परफेक्ट हैं। वह आते हैं और अपने टारगेट को पूरा करने में लग जाते हैं।

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