महिला दिवस पर आज हम आपको रोहट प्रधान सुनिता राजपुरोहित के प्रधान बनने तक के संघर्ष की कहानी से रूबरू करवाना चाहते है। कैसे घर की दहलीज से निकलकर उन्होंने प्रधान बनने तक का सफर तया किया और किन-किन मुशिबतों का सामना करना पड़ा। रोहट प्रधान सुनिता राजपुरोहित बताती है कि वह मूल रूप से किशनगढ़ (अजमेर) की रहने वाली है। पिता रामेश्वरसिंह सेवानिवृत्त आरआई और मां गोपाल कंवर गृहणी है। 12वीं तक की पढ़ाई की। वर्ष 2001 में पाली जिले के छोटे से गांव सुकरलाई निवासी महावीरसिंह राजपुरोहित से सामाजिक रीति-रिवाज से शादी हुई। पति शुरू से ही सामाजिक कार्यों और राजनीति में सक्रिय थे। ऐसे में उन्हें नजदीक से देखा लेकिन कभी सोचा नहीं था कि वे राजनीति में कदम रखेगी। पति के सपोर्ट से किया बीए पास
सुनिता राजपुरोहित बताती है कि उन्हें आगे पढ़ने की चाह थी। शादी के बाद घर के काम-काज में व्यस्त हो गई। इस दौरान दो प्यारे से बेटे युवराज और विश्वजीत को जन्म दिया। जो आज 21 और 22 साल के है। उनकी परिवश और घर की जिम्मेदारियों के बीच एक दिन पति को आगे पढ़ने की इच्छा बताती तो उन्होंने तुरंत हां भर दी और शादी के बाद ससुराल आने के बाद बीए पास किया। सोचा था कि टीचर बनूंगी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। ग्रामीणों के कहने पर लड़ा चुनाव
सुनिता राजपुरोहित बताती है कि वर्ष 2010 में सरपंच पद के चुनाव आए। महिला सीट होने पर ग्रामीणों ने उन्हें खड़ा होने के लिए कहा पति महावीरसिंह राजपुरोहित ने भी साथ दिया और चुनाव लड़ा। हालाकि पहला चुनाव था। लेकिन कुछ वोट से हार गई। लेकिन इस हार में ही उनकी जीत छिपी हुई थी। दिल पर ऐसी ठेस लगी कि अब तो राजनीति में कुछ करके दिखाना है। फिर क्या था पूरे रोहट क्षेत्र में वह सक्रिय हो गई। पति के साथ कार्यक्रमों में जाने लगी। लोगों की समस्या को लेकर आवाज उठाने लगी। उसका नतीजा यह रहा कि कुछ ही महिनों में रोहट क्षेत्र के लोगों के दिल में उन्होंने अपने लिए जगह बना दी। वर्ष 2015 में पंचायत समिति का चुनाव लड़ा। जिसमें भारी वोट से वह जीत तब जाकर दिल को सुकून मिला। लेकिन यह तो बस शुरूआत थी। इस जीत ने उन्हें और भी मजबूत बना दिया ताकि लोगों की सेवा कर सके। दिसम्बर 2020 में जब चुनाव हुए तो वह रोहट प्रधान बनी। अभी भी उनका कार्यकाल जारी है। और घर परिवार की जिम्मेदारी के बची वे रोहट क्षेत्र के 84 गांवों और करीब 60 ढाणियों के ग्रामीणों की सेवा में जुटी है। उन्होंने बताया कि उनके इस समय में सास-ससुर गीतादेवी-लालसिंह राजपुरोहित का भी पूरा सपोर्ट रहा।
ऐसे होती है दिन की शुरुआत
सुनिता राजपुरोहित बताती है कि कैसे वह घर परिवार और अपने राजनीति कॅरियर को मैनेज करती है। वे बताती है कि सुबह पांच बजे रोजाना उठना होता है। वृद्ध सास-सुसर के चाय, खाना अपने हाथों से परोसने के बाद वे सुबह 9 बजे तक घर का काम काज पूजा कर फ्री हो जाती है और फिर पंचायत समिति के लिए निकल जाती है। वर्तमान में उनके क्षेत्र का ऐसा कोई गांव नहीं है जहां वे एक भी बार जाकर नहीं आई हो।
अब तक ये करवाए प्रमुख कार्य
– गांवो में बस स्टेण्ड (यात्री प्रतीक्षालय) का निर्माण करवाया।
– स्कूलों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए टीन शेड का निर्माण करवाया।
– गांवों में स्वच्छता के लिए सिवरेज का कार्य, सीसी सड़को, इंटरलोकिंग ब्लॉक लगवाने। – पौधेरोपण करवाने, स्कूलों में खेल मैदान, कक्षा कक्ष बनवाएं।
– समिति मुख्यालय पर मीटिंग हाल व अम्बेडकर भवन जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए।
– कोरोना जैसी महामारी में पूरी सक्रियता से काम किया। मनरेगा श्रमिकों को मास्क वितरित किए।
– लम्पी बीमारी के दौरानगौशालाओ में दवाईया भी पहुंचाई।
– रोहट में आयोजित स्काउट गाइड की राष्ट्रीय जम्बूरी के आयोजन में पूर्ण सक्रिय भूमिका निभाई


