राज्य के डैमों का पहली बार होगा ‘हेल्थ चेक’,:स्वतंत्र पैनल करेंगे जांच, झारखंड के अधिकांश बांध 50 से 60 वर्ष पुराने हो चुके

पेयजल, सिंचाई और बाढ़ प्रबंधन से जुड़े बड़े बांधों की व्यापक तकनीकी जांच शुरू, विशेषज्ञ देंगे सुझाव झारखंड के सभी बड़े बांधों (डैम) का पहली बार व्यापक तकनीकी हेल्थ चेक होगा। झारखंड गठन के बाद पहली बार दो स्वतंत्र विशेषज्ञ एजेंसियां इन बांधों की सुरक्षा और मजबूती का आकलन करेंगी। राज्य के अधिकांश बड़े बांध 50 से 60 वर्ष पुराने हो चुके हैं। ऐसे में उनकी वर्तमान स्थिति की वैज्ञानिक जांच कर यह देखा जाएगा कि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए कितने सुरक्षित हैं। जल संसाधन विभाग ने राज्य के महत्वपूर्ण बांधों की कॉम्प्रिहेंसिव डैम सेफ्टी इवैल्यूएशन के लिए दो स्वतंत्र विशेषज्ञ पैनल (आई-पी-ओ-ई) के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य केवल बांधों की तकनीकी मजबूती का आकलन करना नहीं, बल्कि भविष्य में संभावित दुर्घटना, बाढ़, पेयजल आपूर्ति में बाधा और सिंचाई संकट जैसी स्थितियों को समय रहते रोकना भी है। विशेषज्ञ पैनल में डैम डिजाइन, निर्माण, भूविज्ञान, हाइड्रोलॉजी, हाइड्रो-मैकेनिकल सिस्टम, इंस्ट्रूमेंटेशन और भूकंप विज्ञान के विशेषज्ञ शामिल होंगे। ये विशेषज्ञ प्रत्येक बांध की संरचनात्मक स्थिति, पानी के दबाव को सहने की क्षमता, फाटकों एवं उपकरणों की कार्यक्षमता और सुरक्षा मानकों का स्वतंत्र आकलन करेंगे। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है
लाखों लोगों की जीवनरेखा हैं बांध
झारखंड के बांध लाखों लोगों की जीवनरेखा हैं। रांची की अधिकांश जलापूर्ति गेतलसूद डैम से होती है। कई जिलों की सिंचाई परियोजनाएं भी बड़े बांधों पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि किसी बांध में तकनीकी कमजोरी या सुरक्षा संबंधी खामी रह जाती है तो उसका सीधा असर पेयजल, खेती, उद्योग और बाढ़ नियंत्रण पर पड़ सकता है। क्यों जरूरी है यह स्वतंत्र जांच
बांध कई दशक पुराने हैं। समय के साथ उनकी संरचना, मशीनरी और सुरक्षा प्रणाली की नियमित जांच जरूरी हो जाती है। वहीं, जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में अत्यधिक बारिश और अचानक जलस्तर बढ़ने की घटनाएं भी बढ़ी हैं। यह मूल्यांकन बताएगा कि मौजूदा परिस्थितियों में बांध कितने सुरक्षित हैं। कहां सुधार की जरूरत है। 2021 में डैम सेफ्टी एक्ट लागू : डैम सेफ्टी एक्ट-2021 लागू होने के बाद सभी राज्यों के लिए बड़े बांधों की समय-समय पर स्वतंत्र तकनीकी जांच कराना जरूरी किया गया है। इसी के तहत झारखंड सरकार विशेषज्ञों का स्वतंत्र पैनल बना रही है। पैनल तकनीकी मूल्यांकन करेगा। सुरक्षा संबंधी सुझाव देगा।

डैमों की सुरक्षा व फाटकों की गुणवत्ता का आकलन होगा
विभागीय स्तर पर समय-समय पर बांध और फाटकों की जांच होती रहती है, लेकिन समेकित और स्वतंत्र तकनीकी मूल्यांकन अधिक प्रभावी होगा। इससे बांधों और फाटकों की गुणवत्ता का सही आकलन होगा और आने वाले कई वर्षों तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। -अशोक कुमार, सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर, डब्ल्यूआरडी

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