सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी खारिज होने के बाद सरकार ने बदला 2019 का संकल्प, वित्तीय लाभ से जुड़ी शर्त हटाई झारखंड सरकार ने करीब दो दशक से चले आ रहे अप्रशिक्षित शिक्षकों के सबसे बड़े सेवा विवाद पर बड़ा फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज किए जाने के बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने नया संकल्प जारी कर वर्ष 2019 के उस प्रावधान को समाप्त कर दिया है, जिसके तहत मृत और सेवानिवृत्त अप्रशिक्षित शिक्षक ग्रेड-1 के वित्तीय लाभ से वंचित थे। अब ऐसे शिक्षकों के आश्रित या स्वयं सेवानिवृत्त शिक्षक विभाग में दावा प्रस्तुत कर सकेंगे, जिससे उन्हें नियमानुसार वित्तीय लाभ मिल सकेगा। सरकार ने वर्ष 2015 में 1987, 1988, 1994 और 1999-2000 में नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से ग्रेड-1 वरीयता देने का निर्णय लिया था। इसके बाद अन्य वर्षों में नियुक्त शिक्षकों ने भी समान लाभ की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया। सरकार ने वर्ष 2019 में लाभ का दायरा बढ़ाया, लेकिन एक शर्त जोड़ दी कि मृत और सेवानिवृत्त शिक्षकों को कोई वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा। झारखंड हाईकोर्ट ने 19 सितंबर 2023 को इस शर्त को रद्द कर दिया। इसके खिलाफ सरकार पहले एलपीए व फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंची, पर राहत नहीं मिली। इसके बाद सरकार को नया संकल्प जारी करना पड़ा। किन पर होगा नए आदेश का असर
अब 1982, 1983, 1984, 1986, 1987, 1988, 1994 और 1999-2000 में नियुक्त पात्र अप्रशिक्षित शिक्षकों के अलावा वर्ष 2012 तक अनुकंपा के आधार पर नियुक्त पात्र शिक्षकों के मामलों में भी यह व्यवस्था लागू होगी। यदि संबंधित शिक्षक की मृत्यु हो चुकी है या वह सेवानिवृत्त हो चुका है, तो उसके आश्रित या संबंधित शिक्षक आवेदन देकर अपना दावा प्रस्तुत कर सकेंगे। जानिए क्या है ग्रेड-1
ग्रेड-1 सरकारी प्रारंभिक विद्यालय के शिक्षकों का पहला प्रोन्नति ग्रेड है। इसका सीधा असर वरिष्ठता, वेतनमान, अगली प्रोन्नति और सेवानिवृत्ति लाभ पर पड़ता है। विवाद इस बात पर था कि अप्रशिक्षित शिक्षकों की वरिष्ठता नियुक्ति तिथि से मानी जाए या प्रशिक्षण पूरा होने की तिथि से। अदालतों ने नियुक्ति तिथि को ही आधार माना। इधर, कक्षपाल भर्ती परीक्षा: जेएसएससी ने अधूरे आवेदन के कारण 57,113 फॉर्म रिजेक्ट किए
रांची| झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने झारखंड कक्षपाल प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के अपूर्ण 57,113 आवेदन रद्द कर दिए हैं। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश और सरकार के संकल्प के बाद अधिकतम आयु सीमा की गणना 1 अगस्त 2025 के बजाय 1 अगस्त 2019 से की गई थी। इसके बाद आयोग ने अभ्यर्थियों को दोबारा आवेदन करने और त्रुटियां सुधारने का अवसर भी दिया, लेकिन बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके। इन कारणों से आवेदन हुए रद्द
41,526 आवेदन: केवल रजिस्ट्रेशन कराया, लेकिन आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं की।
14,403 आवेदन: रजिस्ट्रेशन के बाद परीक्षा शुल्क जमा नहीं किया। 34 आवेदन: एससी/एसटी से अन्य श्रेणी में बदलाव के बाद निर्धारित अतिरिक्त शुल्क जमा नहीं किया।
1,150 आवेदन: नाम, पिता-माता का नाम, पता और जन्मतिथि समान होने के कारण डुप्लीकेट पाए गए। ऐसे मामलों में एक वैध आवेदन छोड़कर बाकी सभी रद्द कर दिए गए।


