भास्कर न्यूज | जालंधर बदलते मौसम का असर अब बच्चों और बड़ों की सेहत पर साफ दिखने लगा है। सिविल अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में प्रतिदिन 300 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें रोजाना वायरल फीवर और टाइफाइड के 25 से 30 मरीज शामिल हैं, जबकि सामान्य दिनों में यह आंकड़ा महज 8 से 10 होता था। वहीं, बच्चों में डायरिया और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियों का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। पिम्स की बाल रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना 20 से 25 बच्चे डायरिया से और 2 से 3 बच्चे हेपेटाइटिस-ए से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। पिम्स की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराधा बंसल के अनुसार, मौसम में बदलाव के कारण डायरिया से पीड़ित 2 से 3 गंभीर बच्चों को रोजाना अस्पताल में दाखिल भी करना पड़ रहा है। सामान्य दिनों की तुलना में यह बढ़ोतरी अत्यंत चिंताजनक है। डॉ. तरसेम लाल, सीनियर फिजिशियन बीमारियों के लक्षण डायरिया (दस्त) { छोटे बच्चों को बार-बार पतले दस्त होना। {उल्टी आना और पेट में तेज ऐंठन होना। {शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), सुस्ती और कमजोरी होना। हेपेटाइटिस-ए: {हल्का या तेज बुखार और अत्यधिक थकान होना। {भूख न लगना, उल्टी या जी मिचलाना। {आंखों व त्वचा का रंग पीला होना (पीलिया के लक्षण) और गहरे रंग का पेशाब आना। साफ-सुथरा खाना और पानी: बच्चों को हमेशा उबला हुआ या आरओ का साफ पानी दें। बासी या बाहर का खुला खाना देने से बचें। हाथों की सफाई अनिवार्य: खाना खाने से पहले और टॉयलेट का इस्तेमाल करने के बाद बच्चों के हाथ साबुन से अच्छी तरह धुलवाएं। हाइड्रेशन पर ध्यान दें: दस्त या उल्टी होने पर बच्चे को ओआरएस का घोल, नारियल पानी या उबले पानी में चुटकी भर नमक-चीनी मिलाकर लगातार दें। वैक्सीनेशन: हेपेटाइटिस-ए से बचाव के लिए बच्चे का समय पर टीकाकरण जरूर करवाएं। डॉक्टरी सलाह लें: लक्षण दिखने पर खुद से कोई दवा न दें, तुरंत नजदीकी बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाएं।


