भास्कर न्यूज | अमृतसर चीफ खालसा दीवान के मुख्य कार्यालय में हुई बैठक में पदाधिकारियों और सदस्यों ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अंतरिम कमेटी द्वारा तख्त साहिबान के जत्थेदारों को अचानक बर्खास्त करने पर दुख और गहरी चिंता जताई। बैठक में प्रधान डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर और ऑनरेरी सचिव सविंदर सिंह कत्थूनंगल ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख पंथ का सर्वोच्च तख्त है। यहां जत्थेदार पूरी कौम का मार्गदर्शन करते हैं और गुरमत मर्यादा के अनुसार पंथक फैसले लेते हैं। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी की अंतरिम कमेटी द्वारा बिना पंथक समर्थन के जत्थेदारों को हटाना न केवल उनके सम्मानित पद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि यह फैसला सिख पंथ के हित में भी नहीं है। इससे सिख समाज में संदेह और असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सिख कौम को अपने धार्मिक पदों की गरिमा और परंपराओं को बचाने की जरूरत है। बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि तख्तों के जत्थेदारों से जुड़े फैसले पंथक सर्वसम्मति से होने चाहिए। इसमें धार्मिक संगठनों, संगतों और पूरे खालसा पंथ की भागीदारी होनी चाहिए। यह सिर्फ एसजीपीसी की अंतरिम कमेटी का विषय नहीं होना चाहिए। जत्थेदारों को बिना किसी दबाव के सिख पंथ के सामूहिक फैसलों के अनुसार कार्य करना चाहिए।


