चुनाव में मुफ्त की रेवड़ियों के वादे से बचेगी भाजपा:फ्रीबीज का नया फॉर्मूला लाने की तैयारी, असम विधानसभा चुनाव से होगी शुरुआत

भाजपा अब चुनाव के दौरान मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त की घोषणाओं (फ्रीबीज) पर ब्रेक लगाने की तैयारी में है। पार्टी ने फ्रीबीज की जगह वैकल्पिक मॉडल तैयार किया है। इसमें खाते में सीधे कैश ट्रांसफर या अन्य छूट (नॉन परफॉर्मिंग एक्सपेंडिचर) की जगह कामकाज को बढ़ाने और ऐसे मदों के लिए आर्थिक मदद की घोषणा होगी, जिससे राज्य की जीडीपी को गति मिले। नए मॉडल की शुरुआत 2026 में होने वाले असम विधानसभा चुनाव से होगी। भाजपा यह व्यवस्था उन्हीं राज्यों में लागू करेगी, जहां पार्टी खुद सरकार में है या मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में है या जहां अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। जहां पहले से फ्रीबीज की घोषणा हो चुकी है या पार्टी ने जिसका वादा किया है, वह जारी रहेगा, पर अगले चुनाव में वहां भी नया मॉडल लागू होगा। यानी 2028 के बाद भाजपा शासित सभी राज्यों में यह व्यवस्था होगी। भाजपा की कई मेनिफेस्टो कमेटी से लंबे समय से जुड़े रहने वाले एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि दिल्ली चुनाव के दौरान ही शीर्ष नेतृत्व ने अगले चुनावों में फ्रीबीज का वैकल्पिक मॉडल अपनाने के लिए रणनीति बनाने का विचार रखा था। असम में 4 लाख स्वयं सहायता समूह
असम भाजपा के अध्यक्ष दिलिप सैकिया का कहना है कि यदि असम की बात करें तो यहां लगभग 4 लाख स्वयं सहायता समूह हैं। हर ग्रुप में 10 महिलाएं हैं यानी 40 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। ऐसे में हर महिला को सालाना 10 हजार रु. सालाना मदद देने से उनका कारोबार बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अगले साल उन्हें 10 की जगह 20 हजार रु. दिलाएंगे। इनमें 10 हजार का लोन होगा, जो सस्ती ब्याज दरों पर उन्हें लौटाना होगा और बाकी 10 हजार रु. सरकार की तरफ से (चुनावी घोषणा पत्र के वादे) के तहत दिए जाएंगे। इस तरह हर महिला 5 साल में कुल 90 हजार रुपए अपने कारोबार में लगा सकती है। इससे राज्य की आर्थिक गतिविधियों में लगभग 33 हजार करोड़ आएंगे। अर्थात ये पैसे परफॉर्मिंग असेट के रूप में लगेंगे, जिससे राज्य की आर्थिक सेहत सुधरेगी। भाजपा नेता बोले- छोटे दुकानदारों और रेस्त्रां वालों को एकमुश्त राशि देंगे सवाल : क्या फ्रीबीज का नया वैकल्पिक मॉडल सिर्फ सेल्फहेल्प ग्रुप पर लागू होगा? जवाब: नए मॉडल में कई उपाय हैं और कुछ पर काम चल रहा है। छोटे-मोटे दुकानदार, रेस्टोरेंट चलाने वाले निम्न आय वर्गीय परिवार, पिछड़े, दलित और समाज के जरूरतमंद तबकों के लोगों को सरकार सालाना एकमुश्त राशि देंगे। महिला स्कीम का चुनाव से कनेक्शन, ऐसे समझें… असर- महिला भागीदारी चुनाव में गेमचेंजर बन गई फ्रीबीज पर सुप्रीम कोर्ट भी कई बार चेतावनी दे चुका है… तेलंगाना CM बोले- फ्रीबीज पर राष्ट्रीय बहस की जरूरत, ये किसी एक से नहीं होगा
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्‌डी ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा- हमारे राज्य की मासिक आय 18,500 करोड़ रु. है। इसमें 6,500 करोड़ रु. सैलरी-पेंशन और 6,500 करोड़ रु. कर्ज-ब्याज भुगतान में जाते हैं। सभी तरह के वेलफेयर और डेवलपमेंट के लिए 5500 करोड़ रुपए बचते हैं। कार्यक्रम में रेवंत से पूछा गया कि हर महीने बेरोजगारों को 4 हजार रुपए देने की गारंटी आप कैसे पूरी करेंगे? परिसीमन और वन नेशन, वन इलेक्शन की जगह इस पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए। किसी एक के करने से कुछ नहीं होगा। हमारे पास निवेश करने और पूंजीगत व्यय के लिए पैसे ही नहीं हैं। हर महीने 500 करोड़ रुपए भी पूंजीगत निवेश पर खर्च करने की स्थिति में नहीं हैं। आने वाले दिनों में राज्य का क्या होगा? देश का क्या होगा? ……………………………… फ्रीबीज पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट बोला- चुनाव के वक्त फ्रीबीज का ऐलान गलत:केंद्र से कहा- ऐसा करके आप परजीवियों की जमात खड़ी कर रहे, लोग काम नहीं करना चाहते सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव के वक्त की जाने वाली मुफ्त की योजनाओं (फ्रीबीज) पर सख्त टिप्पणी की। लोग काम करना नहीं चाहते, क्योंकि आप उन्हें मुफ्त राशन दे रहे हैं। बिना कुछ किए उन्हें पैसे दे रहे हैं। कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि इन लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की बजाय, क्या आप मुफ्त की योजनाएं लागू करके परजीवियों की जमात नहीं खड़ी कर रहे हैं? पूरी खबर पढ़ें…

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