प्रदेश के 43 हजार से ज्यादा स्कूल सफाईकर्मी आंदोलन के मूड में हैं। वो जशपुर में पैदल मार्च निकालकर वहां मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की तैयारी में हैं। होली का त्योहार बीत जाने के बाद ये कर्मचारी पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे है। ये कर्मचारी मानदेय बढ़ाने, पद के अनुसार ही काम कराए जाने की मांग को लेकर 15 सालों आंदोलन कर रहे हैं। इस बार इन कर्मचारियों ने तय किया है कि स्कूल शुरू होने से पहले मांगें नहीं मानी गई तो हड़ताल कर देंगे। 9 मार्च को रायपुर कलेक्टर पार्क के प्रदेश स्तरीय बैठक में आगे के आंदोलन की रणनीति को तय किया गया है। कर्मचारियों ने बताया छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पिछले 15 सालों से 43301 अंशकालिन स्कूल सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं। स्कूलों में हमारा काम सुबह 2 घंटे निर्धारित है मगर लगभग 90% स्कूलों में भृत्य, चपरासी के पद रिक्त होने के कारण भृत्य, चपरासी के सभी काम स्कूल सफाई कर्मचारियों से लिया जाता है। जिसके कारण पूरा दिन स्कूलों में व्यतीत हो जाता है।
काम के एवज में प्रतिमाह 3000 से 3400 रू मानदेय भुगतान किया जाता है। जो कि इस महंगाई भरे दौर में इतने कम रुपए में अपने परिवार का भरण पोषण नहीं पाते हैं। कर्मचारीयो कि स्थिति दिनों दिन दयनीय होती जा रही है।
पूर्व में कांग्रेस सरकार के द्वारा संघ की मांगों को पूरा करने के लिए लिखित और मौखिक रूप से आश्वासन दिया था परंतु मांगे पूरी नहीं किया।
2023 विधानसभा चुनाव के पूर्व स्कूल सफाई कर्मचारी संघ को जिला जशपुर के बगिया मे, कार्यक्रम के दौरान माननीय विष्णु देव साय जी और गोमती साय जी ने आस्वस्थ किया था कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने पर संघ की मांगों को पूरा किया। 18 माह बीत जाने के बाद भी संघ की मांगे पूरी नहीं हुई है संगठन की मांगों को पूरा किए जाने को लेकर शासन और प्रशासन से लगातार ज्ञापन मुलाकात किया गया था।
संघ के कर्मचारियों को उम्मीद थी कि मार्च 2025 26 के बजट में मांगे पूरी होगी परंतु विष्णु देव सरकार के द्वारा मांगे पूरी नहीं किए जाने पर कर्मचारियों में आक्रोश है ।


