भास्कर न्यूज |अमृतसर अमृतसर गेम्स एसोसिएशन (एजीए) में गड़बड़ियां रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। अफसरशाही हावी होने के कारण मनमर्जी तरीके से एजीए का पदाधिकारी लगा दिया जा रहे। 5 माह पहले तत्कालीन डीसी ने नियम विपरीत आप पार्टी के लीडर यूथ विंग सूबा जनरल सेक्रेटरी नवजोत ग्रोवर को एजीए का मेंबर नहीं होने के बाद भी सेक्रेटरी लगा दिया था। हाईकोर्ट के वकील शैलेंद्र शर्मा की तरफ से बीते 23 फरवरी को डीसी कम एजीए चेयरमैन को लीगल नोटिस जारी करने के बाद बीते 3 मार्च को सेक्रेटरी लगे ग्रोवर को पद से हटा दिया। उनकी जगह पर एसडीएम कम एजीए वाइस प्रेसीडेंट मनकंवल सिंह को सेक्रेटरी की जिम्मेदारी सौंपी है। लेकिन लोढ़ा कमेटी की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश के मुताबिक किसी भी मंत्री व सरकारी अफसर को एजीए का पदाधिकारी नहीं लगाया जा सकता है। लेकिन 5 सालों से एसडीएम-आरटीए सेक्रेटरी व अंडर ट्रेनिंग पीसीएस अफसरों को एजीए का सेक्रेटरी व दूसरे पदों पर लगाया जाता रहा है। इन गड़बड़ियों पर रोक लगाने की जगह, आगे भी सिस्टम इसी तरह से बना हुआ है। बता दें कि साल 2020 में एजीए का चुनाव कराया गया था। तब 29 मेंबरों की गर्वनिंग बॉडी बनी थी। इसमें 4 वाइस प्रेसीडेंट थे। जिसमें विजय ढींगरा, इंदरजीत सिंह बाजवा, पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर रमन बख्शी और डॉक्टर शहबाज का नाम शामिल था। हालांकि इनमें से एक को बाद में सस्पेंड कर दिया गया। करीब 3 माह पहले एसडीएम को वाइस प्रेसीडेंट लगा दिया गया था। प्रशासनिक पदों पर तैनात अफसरों के पास एजीए में बड़े पदों पर जिम्मेदारी मिलने से गवर्निंग बॉडी के अधिकारों का दुरुपयोग किया जा रहा है। गवर्निंग बॉडी को एजीए चलाना चाहिए लेकिन अफसर चलने नहीं देते।


