तीन बेटों को माता और पिता का भरण-पोषण करने आदेश पारित

सर्वोच्च न्यायालय से तहसील स्तर के न्यायालयों में लोक अदालत का आयोजन किया गया। राजनांदगांव और एमएमसी, केसीजी जिले के न्यायालयों में लंबित, राजस्व न्यायालय, प्री-लिटिगेशन के 1 लाख 10 हजार 369 प्रकरणों को निराकरण करने चिन्हित किया गया। कुल 49 खंडपीठों का गठन कर 1 लाख 6 हजार 657 मामलों का निपटान किया गया है। कुल 1 लाख 973 मामले प्री-लिटिगेशन चरण के थे और 5 हजार 684 मामले ऐसे थे, जो विभिन्न न्यायालयों में लंबित थे। निपटान राशि लगभग 191 करोड़ 64 लाख 63 हजार 658 रुपए 87 पैसे थी। नेशनल लोक अदालत में आपराधिक राजीनामा योग्य मामले, मोटर वाहन दुर्घटना दावा से संबंधित मामले, चेक से संबंधित मामले, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद के मामले, बैंक ऋण वसूली, विद्युत एवं टेलीफोन बिल के मामले, भूमि अधिग्रहण से संबंधित मामले, राजस्व न्यायालय के मामले एवं अन्य राजीनामा योग्य वाद से संबंधित मामलों की सुनवाई की गई। प्रधान जिला न्यायाधीश व अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव सुषमा सावंत के निर्देशन में नेशनल लोक अदालत का वर्चुअल और भौतिक उपस्थिति मोड में आयोजन किया गया। तीन पुत्र माता-पिता को 3-3 माह अपने पास रखेंगे पक्षकार थनवारिन सोनकर व अन्य विरूद्ध धनेश सोनकर व अन्य, आवेदक जन्म से दिव्यांग है जो भिक्षा से जीवन चलाते है। अनावेदक डोंगरगांव में पत्नी के साथ निवास कर केटरिंग का कार्य करते हैं। विगत 15-20 वर्षों से आवेदक का ध्यान नहीं रखते। तथ्यों के मद्देनजर राजीनामा की कार्रवाई की। अनावेदक ने कहा अपने परिवार का पालन करते हैं। माता-पिता का पालन नहीं कर सकते। सुझाव दिया कि आवेदक के 3 पुत्र हैं, जो 3-3 माह माता-पिता को साथ में रखकर उनका पालन करें। तीनों पुत्रों के घर में 3-3 माह रहने की सहमति दी गई। 14 माह से लंबित पती और पत्नी के मामले निपटाए पक्षकार ज्ञानदास कोसरे विरूद्ध लक्ष्मी कोसरे का विवाह हिन्दू धर्म अनुसार संपन्न हुआ और उनके 2 पुत्र है। प्रतिवादी द्वारा वादी और उसके परिवार वालों के साथ ठीक व्यवहार नहीं करती थी और वादी के माता-पिता के साथ नहीं रहना चाहती हूं, कहकर विवाद करती थी आए दिन अपनी माता और भाई को बुलाकर मायके चली जाती। वह 11 जुलाई 2024 से बच्चों को साथ लेकर मायके रह रही है। दोनों पक्षों को समझाईश देने पर पति-पत्नी पुन: दाम्पत्य जीवन निर्वाह करने साथ-साथ रहने सहमत हुए। करीब 14 माह से लंबित मामले का निराकरण किया गया।

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