विधानसभा में बुधवार का सत्र तीखी नोकझोंक और अप्रत्याशित घटनाक्रम का गवाह बना। प्रश्नकाल समाप्त होते ही विपक्ष ने भीमराव आंबेडकर को लेकर दिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी और माफी की मांग की। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे वेल में आ गए, जिनके पीछे कांग्रेस के अन्य विधायक भी विरोध जताने पहुंचे। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा विधायकों ने भी वेल में पहुंचकर नारेबाजी का विरोध करना शुरू कर दिया। विधानसभा में लंबे समय बाद ऐसी स्थिति बनी जब सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों एक साथ वेल में खड़े हुए और मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भी एक-दूसरे के खिलाफ आक्रोशित नजर आए। मुख्यमंत्री यादव ने गुस्से में कहा, ‘सदन चलना हो तो चले, नहीं चलना हो तो न चले, लेकिन विपक्ष ने जो कहा है, उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।’ स्पीकर की नसीहत- जो सदन में नहीं, उसका जिक्र नहीं करें संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने सदन में दूसरे सदन की चर्चा को नियमों के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी चर्चाएं अध्यक्ष की अनुमति से ही की जानी चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था देते हुए कहा, ‘सदन चर्चा के लिए है, पर यह नियमों व प्रक्रियाओं के दायरे में रहकर होनी चाहिए।’ अध्यक्ष ने सभी सदस्यों को मर्यादा और नियमों का पालन करने की नसीहत दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में उन व्यक्तियों का जिक्र न किया जाए, जो सदन में उपस्थित होकर अपना पक्ष नहीं रख सकते। सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित… हालात बिगड़ते देख विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया। इस दौरान कांग्रेस विधायकों ने सदन से बाहर प्रदर्शन किया। 15 मिनट बाद कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर अध्यक्ष ने विपक्ष की विवादित बयानबाजी को कार्यवाही से विलोपित करवा दिया।


