जांजगीर-चांपा जिला अस्पताल में सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। मंगलवार को डॉक्टरों ने अस्पताल की OPD बंद कर दी और साइकिल स्टैंड में बैठकर मरीजों का मुफ्त में इलाज किया। विरोध प्रदर्शन का असर मरीजों पर पड़ रहा है। आंदोलनकारी डॉक्टरों की पर्ची से न तो मरीजों को दवाएं मिल रही हैं और न ही जांच हो पा रही है। अस्पताल की OPD में सिर्फ सिविल सर्जन और एक डॉक्टर ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं। बता दें कि सिविल सर्जन पर सीनियर स्टाफ नर्स के साथ अभद्र व्यवहार और पद का दुरुपयोग करने का आरोप है। इस मामले पर स्वास्थ्य मंत्री ने संज्ञान लेते हुए जांच कमेटी भी बनाई है। उधर अस्पताल के पूरे स्टाफ प्रदेश स्तर पर आंदोलन की रणनीति बना रहे है। पिछले एक सप्ताह से विरोध जारी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ का आरोप है कि सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल उनका अपमान करते हैं। वे अस्पताल में तनावपूर्ण माहौल बनाते हैं। पिछले एक सप्ताह से यह विरोध जारी है। तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन डॉक्टरों और नर्सों ने 5 मार्च को कलेक्टर से शिकायत की। कलेक्टर ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। जांच के दौरान आरोप लगा कि सिविल सर्जन नर्सों को धमकी दे रहे हैं। वे स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय अधिकारियों तक अपनी पहुंच होने का दावा कर विरोध करने वालों को धमकी दे रहे हैं। मनमाने तरीके से डॉक्टरों की भर्ती डॉ. इकबाल हुसैन के मुताबिक, सिविल सर्जन ने शासन की नीति के खिलाफ कई कार्य किए हैं। उन्होंने मनमाने तरीके से डॉक्टरों और नर्सों की प्रतिनियुक्ति की है। 100 बिस्तर वाले अस्पताल में संसाधनों और स्टाफ की कमी के बावजूद 200 मरीजों को भर्ती कर उनकी जान को जोखिम में डाला। प्रदेश स्तर पर आंदोलन की तैयारी मंगलवार को डॉक्टर और कर्मचारी संघ की बैठक होगी। इसमें आंदोलन को तेज करने पर चर्चा होगी। प्रशासन से सिविल सर्जन को हटाने की मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को प्रदेश स्तर तक ले जाने की तैयारी है।


