किसानों की आय बढ़ाने की पहल:5 साल में 5.6 करोड़ फलदार पेड़ लगाए, 4700 गांवों में बदलाव की शुरुआत

एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप ने ग्लोबल विकास ट्रस्ट के साथ मिलकर किसान कल्याण की एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इस पहल के तहत राजस्थान के प्रमुख उद्योगपतियों को एक मंच पर लाया गया है। एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप के चेयरमैन रवि झुनझुनवाला के नेतृत्व में यह अभियान चलाया जा रहा है। पिछले 5 वर्षों में 27 जिलों के 4700 से अधिक गांवों में बदलाव की शुरुआत हुई है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए 5.6 करोड़ फलदार पेड़ लगाए गए हैं। ग्रुप की प्रमुख कंपनी RSWM Ltd किसानों को मयंक गांधी के कार्यों से अवगत करा रही है। कंपनी यह सुनिश्चित कर रही है कि हर किसान को लगाए गए पेड़ों से लाभ मिले। एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप, ग्लोबल विकास ट्रस्ट के कृषि प्रशिक्षण केंद्र ‘जीवीटी कृषिकुल’ में किसानों को प्रशिक्षण देगा। यह विश्वस्तरीय केंद्र किसानों, कॉरपोरेट्स और सरकारी अधिकारियों को एक मंच प्रदान करता है। कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उड़ीसा के किसान यहां आकर जीवीटी के प्रमाणित मॉडल की जानकारी ले रहे हैं। झुनझुनवाला का मानना है कि भारत के किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उनकी समृद्धि से ही देश की प्रगति संभव है। उन्होंने कहा- खुशी है कि हमें मयंक गांधी और उनके संगठन ग्लोबल विकास ट्रस्ट के साथ जुड़ने का मौका मिला, जो कृषि को आकर्षक बनाने के लिए प्रयासरत हैं और आधुनिक इनोवेशन एवं संरचित आर्थिक सहयोग के साथ स्थायी आजीविका के मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया- मात्र रु 25 प्रति पौधे की कीमत पर दानदाता सीधे इस नेककाज के लिए अपना योगदान दे सकते हैं। जो किसान पहले सालाना रु 37000 प्रति वर्ष कमाता था अब उसकी आय तीन सालों में बढ़कर तकरीबन रु 4 लाख सालाना तक पहुंच गई है। इस तरह एक बार में मात्र रु 30000 की दानराशि उनके भविष्य को सुरक्षित बना रही है और स्थायी कृषि के माध्यम से उनके जीवन में बदलावकारी प्रभाव उत्पन्न कर रही है। मयंक गांधी, संस्थापक ग्लोबल विकास ट्रस्ट ने कहा, ‘हमारे प्रयास मराठवाड़ा क्षेत्र के परली तालुका में सफल रहे हैं, जो कई सालों से गंभीर सूखे एवं गरीबी की समस्या से जूझ रहा है। हम भूमिगत जल स्तर में सुधार लाकर क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ ही प्रभावी कृषि समाधानों के साथ किसानों की आय बढ़ाने में मदद करना चाहते हैं। हमारे इन प्रयासों के परिणामस्वरूप किसान आत्मनिर्भर होकर गरिमा के साथ जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा- 2016 के बाद से ग्लोबल विकास ट्रस्ट छोटे एवं सीमांत किसानों को कम आय, उच्च जोखिम की फसलों के बजाए उच्च मूल्य के फलों वाले वृक्षों की खेती में सक्षम बनाकर उनकी आर्थिक स्थिरता को सुनिश्चित कर रहा है। उन्हें स्थायी एवं दीर्घकालिक समृद्धि के साथ सशक्त बना रहा है। बेहतर फसलों एवं कृषि की स्थायी प्रथाओं के साथ किसानों की औसत आय रु 38,723 से बढ़कर रु 3,93,986 प्रति एकड़ सालाना तक पहुंच गई है। इसके अलावा 400 करोड़ लीटर से अधिक जल संग्रहण क्षमता भी विकसित हुई है, जो किसानों को सूखे एवं जल संकट की समस्या से सुरक्षित रखने में मदद करती है।

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