भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा जिले में 2023 में डीएमएफ मद से जिला निर्माण समिति द्वारा शहर के चितालंका तालाब के सौंदर्यीकरण की योजना बनाई गई थी। 1 करोड़ 98 लाख की लागत से तालाब को सुंदर बनाने की योजना अब अधर में अटक गई है। अब सिर्फ तालाब में कांक्रीट के खंभे खड़े कर दिए गए हैं। तालाब के चारों तरफ लोहे की जाली लगा दी जा रही है। तालाब का काम शुरू करने से पहले इसे पूरा सूखा दिया गया था। अब यहां पानी नहीं है। अधिकारी बोले बोर से पानी भरवाएंगे, फुटपाथ बनाया जाएगा, कांक्रीट के खंभों के ऊपर अब स्लैब नहीं डाला जाएगा, खंभे खड़े रहेंगे। चितालंका तालाब के बीचोंबीच स्लैब डालकर यहां लोगों के लिए पुल बनाया जाना था। जिससे लोग यहां आकर तालाब में लगाई जाने वाली लाइटिंग को देख सकें, पर यह योजना धरी की धरी रह गई। अब तालाब में जहां पानी नहीं है वहां सीढ़ियों को और कांक्रीट के खंभों को रंगाई पुताई कर राशि खर्च की जा रही है। स्लैब गिरने के बाद टली योजना : सीएसआर मद से दंतेवाड़ा में 2023 में चितालंका तालाब का सौंदर्यीकरण का कार्य स्वीकृत हुआ था। पहले इस कार्य के टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए थे। भरी बरसात में 2023 में इस तालाब का कार्य शुरू किया गया था, जिसको लेकर भी विवाद हुआ था। मछलियों के प्रजनन काल के समय तालाब से पानी निकाल दिया गया था. कांक्रीट के खंभों के ऊपर स्लैब डालने का काम भी शुरू हो गया था, पर पहला ही स्लैब गिर जाने के बाद काम को रोक दिया गया था और अब कांक्रीट के खंभों का तालाब में क्या होगा इसका जवाब विभाग के पास नहीं है। ग्रामीण यांत्रिकी कर रहा तालाब को सुंदर बनाने का काम चितालंका तालाब का कार्य आरईएस विभाग द्वारा करवाया जा रहा है। आरईएस विभाग जिले में दंतेश्वरी मंदिर से लेकर इस विभाग द्वारा किए जा रहे दर्जनों कार्य पूर्व कलेक्टर के समय विवादों में घिरे रहे हैं, उन्हीं कार्यों में से चितालंका तालाब भी है। शहर के सबसे छोटे पानी से भरे हुए तालाब को खाली कर इसको सुंदर बनाने के नाम पर सीएसआर मद के करोड़ों रुपये खपाए जा रहे हैं। जबकि इस तालाब का काम शुरू करने से पहले स्थानीय ग्रामीणों से सहमति तक नहीं ली गई थी। इस संबंध में ग्रामीण यांत्रिक विभाग के ईई राजू विजय टंडन ने कहा स्लैब नहीं डालेंगे। अब तालाब में फुटपाथ बना रहे हैं, तालाब में बोर से पानी भरवाएंगे।


