CJ बोले-क्या कर रहे जिम्मेदार अफसर?:एंबुलेंस नहीं मिलने से मरीज की मौत, हाईकोर्ट ने कहा-सरकार की योजना का लोगों को नहीं मिल रहा लाभ

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रवींद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताई है। राज्य सरकार की मुफ्त की योजनाएं हैं, फिर भी लोगों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव को हलफनामा पेश करने कहा है। दरअसल, दंतेवाड़ा में एम्बुलेंस नहीं मिलने से मरीज की मौत और बिलासपुर रेलवे स्टेशन में कैंसर पीड़ित महिला का शव ले जाने एंबुलेंस सुविधा नहीं मिलने को लेकर हाईकोर्ट ने सुनवाई शुरू की है। अब केस की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी। एक घंटे इंतजार के बाद भी शव ले जाने नहीं मिला एम्बुलेंस पिछले मंगलवार को रायपुर से बिलासपुर आकर यहां से बुढ़ार जाने के लिए ट्रेन में सफर कर रही एक कैंसर पीड़ित महिला रानी बाई (62) की मौत हो गई। ट्रेन के बिलासपुर पहुंचने पर शव को उतारकर कुली की मदद से उन्हें स्ट्रेचर से गेट नंबर एक के बाहर तक लाया। वहां पर एंबुलेंस का ड्राइवर गायब था। थोड़ी देर बाद वह आया, लेकिन बॉडी ले जाने से मना कर दिया। महिला के परिजनों के परिचितों के जरिए दूसरे एंबुलेंस का इंतजाम किया और वहां से एक घंटे बाद रवाना हो गए। उन्हें बिलासपुर से शाम वाली ट्रेन पकड़कर बुढ़ार जाना था। दंतेवाड़ा में 11 घंटे तक नहीं पहुंची एंबुलेंस, मरीज की मौत वहीं, दंतेवाड़ा जिले गीदम में 11 घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंचने के कारण इलाज में देरी हुई, जिससे मरीज की मौत हो गई। इस दौरान परिजन बार-बार 108 को कॉल करते रहे। लेकिन, सुबह के बजाए एंबुलेंस रात में आई। इसके चलते मरीज की जान चली गई। इससे नाराज परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा मचाया। हाईकोर्ट ने कहा- रेलवे के अस्पताल प्रबंधन क्या कर रहा हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट पर जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की है। इस दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि राज्य सरकार कैंसर पेसेंट को एंबुलेंस नहीं दिला पा रही है। रेलवे में भी अस्पताल है। इसके बाद भी महिला को एंबुलेंस नहीं मिली। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि राज्य सरकार लोगों को फ्री एंबुलेंस सेवा उपलब्ध करा रही है, जिस पर डिवीजन बेंच ने कहा कि ये तो स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही है। चीफ जस्टिस ने कहा कि मरीज को एंबुलेंस नहीं मिला तो उसकी जान ही चली गई। दोनों केस में डिवीजन बेंच ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव को हलफनामा के साथ जवाब देने कहा है।

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