राजधानी का पब्लिक ट्रांसपोर्ट ही बदहाल:100 सिटी बसों में 63 हुईं कबाड़, 37 को जहां जरूरत वहीं नहीं चला रहे, 100 ई-बसें ला रहे

राजधानी में सिटी बसें बिना किसी प्लान और रूट के दौड़ रही हैं। कोरोना के पहले शहर में 100 सिटी बसें चला करती थी। धीरे-धीरे 53 सिटी बसें कबाड़ में बदली, लेकिन एक साल के भीतर ही 10 सिटी बसें और कबाड़ हो गई हैं। ऑरेंज कलर वाली सिटी बसों को सड़क से बाहर कर दिया गया है। ये सभी एसी बसें हैं जो कोरोना काल से ही बंद हैं। इसमें भिलाई-दुर्ग से रायपुर एयरपोर्ट चलने वाली बसें भी शामिल हैं। अभी केवल सफेद रंग ही सिटी बसें शहर में चल रही हैं। कोरोना के बाद से अब केवल 37 सिटी बसों का ही संचालन किया जा रहा है। इन बसों को भी उन रास्तों में नहीं चलाया जा रहा है जहां से ज्यादा जरूरत है। मुख्य सड़कों पर जहां सैकड़ों ई-रिक्शा घूम रहे वहां कोई सिटी बस दिखाई नहीं देती। ऑपरेटर अपनी मर्जी से ही सिटी बसों का संचालन कर रहा है। सिटी बसों के संचालन को लेकर सभी सवालों का ऑपरेटर के पास एक ही जवाब होता है निजी बस वाले चलने नहीं देते। निगम के अफसर मदद नहीं करते इसलिए हम क्या करें? पुरानी बसों का क्या होगा ये भी तय नहीं
नई ई-बसों के आने के बाद पुरानी बसों का क्या होगा इसका जवाब भी निगम अफसरों के पास नहीं है। अफसरों का कहना है कि शहर में प्रदूषण को कम करने के लिए ही नई ई-बसें लाई जा रही हैं। ऐसे में डीजल वाली बसों का सड़क से बाहर करना ही होगा। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक बसें सफल होंगी डीजल बसों से रिप्लेस कर दिया जाएगा। निगम को अभी सिटी बसों के संचालन से कोई खास फायदा नहीं होता है। इलेक्ट्रिक बस एक बार चार्ज करने पर 200 किमी का सफर तय करेगी। सिटी बस की तुलना में इलेक्ट्रिक बस से एक माह में डेढ़ लाख रुपए तक का राजस्व प्राप्त होगा। ऐसे स्टॉपेज बनाए जहां बस ही नहीं रुकती
शहर में करीब 20 बस स्टॉपेज ऐसे बनाए गए हैं जहां बस ही नहीं रुकती है। एक बस स्टॉप बनाने में करीब 20 लाख रुपए खर्च किए गए। इसमें से आधे से ज्यादा बस स्टॉप खंडहर जैसे हो गए हैं। शहर में केनाल रोड में स्थित दो, अंबेडकर अस्पताल के बाहर एक, पुजारी पार्क के आगे एक, कटोरा तालाब गार्डन रोड, काली माता मंदिर आकाशवाणी के पास, ऑक्सीजोन के पास समेत कई जगहों के बस स्टॉपेज बदहाल स्थिति में पहुंच चुके हैं। अधिकतर बस स्टॉपेज पर अवैध कब्जे हो गए हैं। एक बार बस स्टॉप बनने के बाद निगम अफसरों ने कभी भी इसकी जांच तक नहीं की। इस रूट पर सबसे ज्यादा जरूरत लेकिन निगम नहीं चला रहा बस सीधी बात – विश्वदीप, कमिश्नर ननि
पहले रूट बनाएंगे फिर चलाएंगे शहर में जो सिटी बसें वो कबाड़ होती जा रही हैं। जहां जरूरत वहां चल भी नहीं रही? – जो बसें खराब थी उन्हें हटा दिया गया है। पुराने तय रुट पर ही बसें चलाई जा रही हैं।
• सौ नई ई-बसों को लेकर ठोस योजना नहीं है। ऑपरेटर के ही सहारे काम करना होगा? -ऐसा नहीं है। शहर में पहले रुट तय करेंग। जहां जरूरत है वहां ज्यादा बसें चलाएंगे।
• सिटी बसों के लिए बनाए गए बस स्टॉपेज कबाड़ होते जा रहे हैं, कई बर्बाद हो गए? – सभी सिटी बस स्टॉपेज को फिर से ठीक किया जाएगा। ई-बसों को भी यहां रोकेंगे।
निगम की ओर से जो एसी सिटी बसें मिली थी वो कोरोना काल से ही खड़ी थी। उन्हें दोबारा सुधरवाया भी नहीं गया। करीब 18 एसी बसें चार साल से एक ही जगह खड़ी हैं। जो अच्छी हैं उन्हें चला रहे हैं।
– मनीष जैन, मुख्य ऑपरेटर सिटी बस

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