राजस्थान के स्कूलों में स्थानीय भाषा में होगी पढ़ाई:जयपुर, उदयपुर समेत प्रदेश के 9 जिलों में से होगी शुरुआत

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब स्टूडेंट्स को ढूंढाड़ी, मेवाड़ी समेत स्थानीय भाषाओं में पढ़ाया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद प्रदेश के 9 जिलों में शिक्षा विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।
ऐसे में अगले शैक्षणिक सत्र से प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से कक्षा 5 तक) के स्टूडेंट्स अब स्थानीय भाषाओं में शिक्षा हासिल कर सकेंगे। शिक्षामंत्री मदन दिलावर ने कहा कि स्थानीय भाषा के उपयोग और उसके माध्यम से बच्चे को सिखाने की बहुत जरूरत है। उन्होंने कहा कि बच्चे जब अपने परिवेश में कोई भाषा सीखते हैं। तो उनके सीखने का समय और समझ बहुत ही जल्दी विकसित होती है। बच्चों की सहूलियत का रखा जाएगा ध्यान
राजस्थान में कई तरह की बोलियां बोली जाती है।लेकिन शिक्षक और बच्चों की भाषा अलग-अलग होने के कारण बच्चों को स्कूल की भाषा सीखने में थोड़ी परेशानी होती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम और शुरुआती साल में शिक्षण कार्य स्थानीय भाषा में ही होना चाहिए। जिससे बच्चे आसानी से स्कूल की भाषा को सीख पाए। 2 जिलों में चल रहा पायलट प्रोजेक्ट
शिक्षा मंत्री ने बताया कि वर्तमान में 2 जिलों सिरोही और डूंगरपुर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बहुभाषी शिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसे अगले सत्र से प्रदेश के 9 जिलों में लागू किया जाएगा। इसके साथ ही सत्र 2026 से ये कार्यक्रम प्रदेश के 25 जिलों में संचालित किया जाना प्रस्तावित है। प्रदेश के 25 जिलों में 2026 में किया जाएगा लागू
उन्होंने बताया कि प्रदेश में अगले शैक्षणिक सत्र 2025 से सबसे पहले राजधानी जयपुर, उदयपुर, पाली, राजसमंद, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, सिरोही और डूंगरपुर जिलों में स्थानीय भाषा में छोटे बच्चों को पढ़ाया जाएगा। इसके बाद प्रदेश के 25 जिलों में शैक्षणिक सत्र 2026 में इसे लागू किया जाएगा। बता दें कि फिलहाल जयपुर में ढूंढाड़ी, उदयपुर, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ में मेवाड़ी, डूंगरपुर और बांसवाड़ा में वागड़ी, राजसमंद में मेवाड़ी और बागड़ी, सिरोही में मारवाड़ी और पाली में राजस्थानी गोडवाड़ी भाषा का आम बोलचाल में इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा भी इन्हीं स्थानीय भाषाओं में स्टूडेंट्स को पढ़ाने की तैयारी है। ‘जितना छोटा बच्चा, उतना ही ज्यादा सीखेगा‘
शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चा जितना छोटा होता है। उतना ही ज्यादा सीखना है। जैसे अभिमन्यु अपनी मां की पेट में ही सीख गया था। उन्होंने कहा कि आजकल तो वैज्ञानिक भी कहते हैं कि जब महिला गर्भवती हो तब वह अच्छी कहानी सुने। ताकि उनके गर्भ में पलने वाले बच्चों को अच्छी जानकारी हासिल हो सके। उन्हें अच्छे वातावरण में रहने के लिए कहा जाता है। मंदिर जाकर सत्संग सुनने के लिए कहा जाता है। ताकि उनके बच्चे में अच्छे संस्कार आ सके। यह खबर भी पढ़े…
1. डेपुटेशन खत्म होने के बाद अधिकारी-अफसर नहीं मान रहे:शिक्षा मंत्री दिलावर बोले- सरकार के आदेश के खिलाफ काम करने वालों की रिपोर्ट होगी तैयार राजस्थान में शिक्षकों की ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर फिलहाल एक्सपर्ट और शिक्षाविद से राय ली जा रही है। उनकी राय आने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला किया जाएगा। इसके साथ ही कितने पदों पर शिक्षकों की भर्ती होगी। सर्दियों की छुट्टियां इस बार कब से शुरू होगी। राजस्थान के स्कूलों के सिलेबस में कब तक बदलाव होगा। इन मुद्दों को लेकर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से बातचीत की। (पढ़ें पूरी खबर) 2. शिक्षा मंत्री बोले- यूपी जैसा धर्मांतरण बिल लाएंगे:दिलावर ने कहा- 1 महीने पहले कलेक्टर को एप्लीकेशन देनी होगी, मंत्रिमंडल में चर्चा हो चुकी प्रदेश के शिक्षा और पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा- धर्मांतरण बिल पर मंत्रिमंडल में चर्चा हुई है। इसे सैद्धांतिक स्वीकृति भी मंत्रिमंडल ने दे दी है। अब आगे इसको विधानसभा में चर्चा के बाद पारित कराया जाएगा। पारित होने के बाद इसे लागू किया जाएगा। (पढ़ें पूरी खबर​​​​​​​)

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