कांकेर में जंगल की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। ग्राम ठेलकाबोड के आरएफ 68 जंगल में लगभग 8 लोगों ने अवैध मकान बना लिए हैं। इस क्षेत्र में जामवंत परियोजना के तहत बेर सहित कई पौधे लगाए गए थे। लेकिन गर्मियों में लगने वाली आग ने सभी पौधों को नष्ट कर दिया। जंगल की सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग और गेट लगाया गया था। इसके बावजूद जंगल और सड़क के बीच की एक डिसमिल जमीन पर लोगों ने कब्जा कर लिया। शिवनगर से उदयनगर मार्ग पर भी कई लोग बैरिकेडिंग के अंदर मकान बना रहे हैं। वन विभाग और राजस्व विभाग एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी इस मामले में वन विभाग और राजस्व विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। वन विभाग का कहना है कि यह क्षेत्र राजस्व विभाग के अधीन आता है। नियम के अनुसार, सड़क से 5 से 15 मीटर की दूरी छोड़कर मकान बनाना जरूरी है। लेकिन यहां केवल 4-5 मीटर की दूरी पर मकान बनाए गए हैं। गंभीर बात यह है कि इन अवैध निर्माणों को बिजली और पानी की सुविधाएं भी उपलब्ध करा दी गई हैं। अतिक्रमणकारियों के मकानों तक बिजली के पोल लगा दिए गए हैं। कुछ घरों में पानी की सुविधा भी दे दी गई है। ऐसे में जंगल और वन्यजीवों के लिए यह स्थिति चिंताजनक बनती जा रही है। लोगों ने लगाया सागौन तस्करी का आरोप लोगों ने नाम न बताने की शर्त पर आरोप लगाया है कि जंगल में लगातार सागौन के पेड़ काटे जा रहे हैं। हमें शक है कि यह उन्हीं अतिक्रमणकारियों द्वारा किया जा रहा है। विभाग द्वारा जांच किये जाने पर यह पता चल पाएगा पर निश्चित रूप से अतिक्रमण पर रोक लगना चाहिए। जांच में अतिक्रमण मिलेगा तो जरूर कार्यवाही होगी वन विभाग कांकेर मंडल के एसडीओ चंद्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि यह सारी जानकारी आपके माध्यम से मिली है, मैं तुरंत जांच करवाता हूं। हालांकि, कर्मचारियों ने इसे राजस्व क्षेत्र में आना बताया गया है, लेकिन पूरे जंगल के चारों ओर एक बार निरीक्षण करवा लेता हूं। यदि ऐसी बात होगी तो कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया जाएगा।


