अजमेर दरगाह को लेकर लगाई गई याचिका पर शुक्रवार को कोर्ट में सुनवाई होगी। कोर्ट में 3 पक्षकार दरगाह कमेटी, अल्पसंख्यक मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) कोर्ट की और से भेजे गए नोटिस पर अपना पक्ष रखेगा। मामले में सिविल कोर्ट में सुनवाई होगी। बता दे कि हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने दरगाह में मंदिर होने का दावा पेश किया है। विष्णु गुप्ता ने याचिका में रिटायर्ड जज हरबिलास सारदा की 1911 में लिखी किताब अजमेर: हिस्टॉरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव का हवाला दिया है। पहले पढ़िए क्या है पूरा मामला? 27 नवंबर को अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने का दावा करने वाली याचिका अजमेर सिविल कोर्ट ने स्वीकार कर ली थी। अदालत ने इसे सुनने योग्य माना और 20 दिसंबर को सुनवाई की तारीख दी है। दरगाह में मंदिर होने का दावा हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की ओर से पेश किया गया। मामले को लेकर सिविल कोर्ट ने अल्पसंख्यक मंत्रालय, दरगाह कमेटी अजमेर और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) को नोटिस भेजा था। याचिका में रिटायर्ड जज हरबिलास सारदा की 1911 में लिखी किताब अजमेर: हिस्टॉरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव का हवाला देते हुए दरगाह के निर्माण में मंदिर का मलबा होने का दावा किया गया है। साथ ही गर्भगृह और परिसर में एक जैन मंदिर होने की बात कही गई है। हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के दावे के तीन आधार… दरवाजों की बनावट व नक्काशी : दरगाह में मौजूद बुलंद दरवाजे की बनावट हिंदू मंदिरों के दरवाजे की तरह है। नक्काशी को देखकर भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पहले हिंदू मंदिर रहा होगा। ऊपरी स्ट्रक्चर : दरगाह के ऊपरी स्ट्रक्चर देखेंगे तो यहां भी हिंदू मंदिरों के अवशेष जैसी चीजें दिखती हैं। गुम्बदों को देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी हिंदू मंदिर को तोड़कर यहां दरगाह का निर्माण करवाया गया है। पानी और झरने : जहां-जहां शिव मंदिर हैं, वहां पानी और झरने जरूर होते हैं। यहां (अजमेर दरगाह) भी ऐसा ही है। गर्दन काटने की धमकी भी मिली विष्णु गुप्ता को जान से मारने की धमकी भी दी गई। गुप्ता ने बताया- मेरे पास दो फोन आए थे। एक भारत से और दूसरा कनाडा से। कनाडा से आए फोन में मुझे धमकी दी गई कि आपने अजमेर दरगाह का केस फाइल कर बहुत बड़ी गलती कर दी। अब आपकी गर्दन काट दी जाएगी, सिर कलम कर दिया जाएगा। उन्होंने दिल्ली पुलिस से इसकी शिकायत की है। विष्णु गुप्ता ने कहा कि मैं ऐसी धमकियों से डरने वाला नहीं हूं। हम सिर्फ अपना हक मांग रहे हैं, हमने किसी भी भावना को आहत नहीं किया है। न ही किसी की भावना को आहत करना चाहते हैं। अजमेर दरगाह में शिव मंदिर है और कानूनी लड़ाई से उसको वापस लेंगे। इस मामले में ये लोग भी दे चुके बयान जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती: पहले मस्जिद और अब अजमेर शरीफ जैसे मुस्लिम दरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। इससे खून खराबा हो सकता है। अब सवाल बना हुआ है कि विभाजन के दिनों को याद दिलाने वाली सांप्रदायिक हिंसा की जिम्मेदारी कौन लेगा। सपा से राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव:देश में ऐसे छोटे-छोटे जज बैठे हैं, जो इस देश में आग लगवाना चाहते हैं। कोई मतलब नहीं है, हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अजमेर शरीफ पर चादर भिजवाते हैं। हमारे देश और दुनियाभर के लोग वहां जाते हैं। अब उसे विवादों में घसीटना घृणित और ओछी मानसिकता का प्रतीक है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह: अजमेर में कोर्ट ने आदेश दिया है। हमारा काम है किसी हिंदू ने याचिका दायर की और कोर्ट ने सर्वे के लिए आदेश दिया है तो इसमें दिक्कत क्या होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सत्य है जब मुगल आक्रांता आए थे तो हमारे मंदिरों को तोड़ा था। अब आप कहेंगे कितने मस्जिदों पर आप बोलेंगे तो मैं कहूंगा आज तक कांग्रेस की सरकार केवल तुष्टिकरण करती रही। तुष्टिकरण के कारण ही ये हालात हैं। सचिन पायलट: कुछ ताकतें जनता के मुद्दे से ध्यान हटाकर लोगों में तनाव पैदा करना चाहती हैं। बच्चों को नौकरी मिल नहीं रही और इनको मस्जिदों की खुदाई की लग रही है। अगर आप देश में यह मुहिम छेड़ दें कि हमें धर्मस्थल, मकानों को खोदना है और उसके नीचे क्या निकलेगा यह देखना है, तो इसका कोई अंत नहीं है। अजमेर दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन: दरगाह का इतिहास 800 साल पुराना है। उस जमाने में यह सब कच्चा था। गरीब नवाज जब तशरीफ लाए, उस जमाने में यह कच्चा मैदान था। उसके अंदर उनकी कब्र थी। अब खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि जहां कब्र होगी वह भी कच्ची होगी। 150 साल तक आपका मजार कच्चा रहा, वहां बिल्कुल भी पक्का कंस्ट्रक्शन नहीं था। उसके नीचे मंदिर कहां से आ सकता है। बॉलीवुड एक्टर एजाज खान: ये गरीब नवाज हैं, इन्होंने कई गरीबों को अमीर बना दिया हैं। यहां हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब आते हैं। ये ख्वाजा साहब है, यहां मत उलझो, पीढ़ियां की पीढ़ियां उलझ जाएंगी। अजमेर दरगाह विवाद से संबंधित यह खबर भी पढ़िए..


