महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के प्रशासक पर आर्थिक अनियमितता के आरोप लगे हैं। इस मामले में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष व कलेक्टर ने मंदिर के प्रशासक को नोटिस भी जारी किया है। इसमें उन्हें तीन दिन में जवाब देना था। प्रशासक ने अपना जवाब दे दिया है। कलेक्टर के अनुसार प्रशासक ने शीघ्र दर्शन के नीचे प्रतीक्षा हॉल में तीन कमरों का निर्माण करवाया था। इसमें निर्माण नियमों की अनदेखी सामने आई है। साथ ही दानदाताओं के दान का दुरुपयोग किया गया है। बाद में इन कमरों को तुड़वा भी दिया। कलेक्टर नीरजकुमार सिंह का कहना है कि दानदाताओं की राशि से निर्माण कराया था, जो कि नियम विरुद्ध है। इसके लिए भी टेंडर प्रक्रिया, प्रशासनिक व तकनीकी स्वीकृति लेना होती है, जो नहीं ली गई। निर्माण कार्य के नियमों की अनदेखी करने पर प्रशासक गणेशकुमार धाकड़ को नोटिस जारी किया था। उनका जवाब मिल गया है। इस संबंध में तथ्यात्मक त्रुटि और दान में मिली राशि के दुरुपयोग के संबंध में जांच की जाएगी। उधर, प्रशासक धाकड़ का कहना है कि निर्माण में मंदिर की राशि का उपयोग नहीं किया है। इंदौर के दानदाता राहुल अरोड़ा ने कमरे बनवाने के लिए अनुमति मांगी थी, जो उन्हें दी गई थी। उन्होंने डिजाइन के विपरीत पोर्टेबल कक्ष बनवाए, जो कि गलत थे। ऐसे में उन्हें तत्काल हटवा दिया। कलेक्टर ने इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा था, जो कि दे दिया है। मामले में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है। मंदिर का कोई पैसा नहीं लगा है। कलेक्टर ने कई बिंदुओं का नोटिस मंदिर प्रशासक धाकड़ को सौंपा। इसमें स्पष्ट किया कि महाकालेश्वर मंदिर परिसर स्थित शिखर दर्शन के नीचे बने हॉल में प्रशासकीय एवं वित्तीय प्रक्रिया का पालन न करते हुए चैंबर्स, पार्टीशन एवं अन्य संरचनाओं का निर्माण कराया है। नोटिस में इन बातों का मांगा जवाब…। . निर्माण के संबंध में बनाई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट, जिसमें तैयार किया मानचित्र और लागत की गणना की गई है। उपलब्ध कराएं। . डीपीआर के आधार पर प्राप्त की गई तकनीकी स्वीकृति। यदि कार्य के लिए सीबीआरआई की अनुशंसा ली गई है तो उसकी भी प्रति उपलब्ध कराएं। निविदा तैयार करने के लिए कलेक्टर उज्जैन द्वारा गठित समिति की स्वीकृति। . निर्माण कार्य की तकनीकी स्वीकृति के आधार पर प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति। . आमंत्रित निविदा आमंत्रण सूचना, निविदा में भाग लेने वाली एजेंसियों का विवरण, निविदा स्वीकृति के लिए समिति की अनुशंसा के आधार पर प्राप्त निविदा स्वीकृति एवं कार्यादेश की प्रति। भुगतान से संबंधित नस्ती एवं अभिलेख। कार्य करने के लिए निर्धारित शासकीय एजेंसी का नाम तथा ठेकेदार का विवरण।


