भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा जिले के कटेकल्याण ब्लॉक के पखनाचूहा ग्राम पंचायत का कानकीपार गांव सिर्फ इनामी नक्सलियों के नाम से जाना जाता रहा है। 5 साल पहले तक इस गांव में 100 प्रतिशत लोग नक्सल विचारधारा से जुड़े हुए थे। सड़क, पुलिया, आंगनबाड़ी, स्कूल गांव में बनाने का विरोध होता था। कानकीपारा गांव के कई नक्सली समर्पण कर चुके हैं और कई अभी भी जेल में हैं। 5 साल पहले तक इस गांव में जाने से पहले अनुमति लेनी पड़ती थी। नाले को पार करते ही नक्सली पहुंच जाते थे। पर गुरुवार को जब भास्कर की टीम इस गांव में पहुंची तो सब कुछ बदला नजर आया। ग्रामीणों ने बताया नाले में पुलिया बनने से सुविधा तो मिल रही है, पर सड़क नहीं बनी है जिसकी वजह से गांव में ट्रैक्टर छोड़कर दूसरे वाहन नहीं आ पाते हैं। ग्रामीणों ने कहा सड़क निर्माण में कोई नक्सली दहशत नहीं बनेगी गांव में किसी भी विकास कार्य को नहीं रोका जाएगा। पखनाचूहा पंचायत के कानकीपारा के ग्रामीण चुनाव का बहिष्कार करते थे। अब उसी गांव से उप सरपंच बनाया गया है। विधानसभा, लोकसभा चुनाव के साथ-साथ पंचायत चुनाव में भी नक्सल प्रभावित इस गांव के लोग बराबर की हिस्सेदारी निभा रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा नक्सलियों की वजह से गांव काफी पिछड़ गया है। गांव में पर्याप्त हैंडपंप नहीं हैं, आने-जाने का रास्ता नहीं है। एक भी पीएम आवास नहीं बन पाया है। अब ग्रामीण योजनाओं का लाभ लेने अपना नाम जुड़वा रहे हैं। बस्तर नक्सल मुक्त हो रहा है इसका सबसे बड़ा उदाहरण कानकीपारा में देखने को मिलता है, जिस गांव में 5 साल पहले हथियारबंद नक्सली दिन में नजर आते थे, अब उस गांव में ग्रामीण नक्सली नाम से तौबा कर रहे हैं, गांव में आजादी के बाद पहली बार आंगनबाड़ी के रूप में सरकारी भवन बनकर तैयार हुआ है, गांव में कोई भी विकास कार्य नहीं रुकेगा इसकी गारंटी भी युवा ले रहे हैं। जो भी विकास काम नहीं हुए हैं, कराए जाएंगे: कलेक्टर कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कानकीपारा तक पहुंचने वाली सड़क बनाई जाएगी, गांव में जो भी विकास कार्य की जरूरत है करवाया जाएगा।


