मूसल और बैलों से बना रहे सर्दियों के व्यंजन:देसी तरीके से पकवान बनाने की कला, तिल-गुड़ मिलाकर हो रहे तैयार

सर्दी से बचने के लिए लोगों ने कई जतन करना शुरू कर दिया है। उदयपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में पुरानी परम्पराओं के अनुसार लोग सर्दी के देसी व्यंजन वाली खुराक ले रहे है। इस मौसम में लोग खान-पान को लेकर विशेष ध्यान देते हैं। उदयपुर जिले के वल्लभनगर कस्बे के कुलमियों का चौराहा पर पारंपरिक देशी तरीके से पकवान बनाने शुरू कर दिए हैं। भीलवाड़ा जिले के आसींद से सांवरिया गुर्जर सहित अन्य लोगों ने कुलमियों का चौराहा पर पारंपरिक लकड़ी के मुसल व बैलों की सहायता से जगल बनाना शुरू कर दिया है। जिसका स्वाद चखने के लिए कई लोग यहां आ रहे हैं। सांवरिया गुर्जर बताते है- पिछले 5 सालों से सर्दियों के मौसम में यहां आकर पारंम्परिक तिल व गुड से जगल बनाने का काम कर रहे हैं। सर्दी के मौसम में इसकी काफी डिमांड भी रहती है। उन्होंने बताया- देशी गुड़ व तिल से जगल बनाकर लोगों के सामने परोसी जा रही है। वही सर्दी के मौसम में तिल के तेल की भी काफी अच्छी डिमांड रहती है। तिल का तेल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होने से इसकी मांग ज्यादा रहती है। यहां पारंम्परिक घाणी में तिल व गुड़ से जगल बनाई जा रही है। वही तिल का तेल भी निकाला जाता है। लकड़ी की घाणी लगाकर बैल की सहायता से तिल को पिसा जाता है। इसके बाद देशी चरखी पर बना गुड़ मिलाकर जगल बनाई जाती है। वे बताते है कि देशी तरीके से बनी जगल स्वाद में अच्छी होती है। इनपुट : सुरेश मेनारिया, मेनार

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