कोंडागांव में महासाक्षरता अभियान के तहत एक अनूठी पहल देखने को मिली। एक सास-बहू की जोड़ी ने एक साथ परीक्षा में हिस्सा लिया। इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने अनोखी पहल की। प्रशासन ने गांव-गांव जाकर हल्दी लगे पीले चावल बांटे। आमतौर पर पीले चावल का उपयोग शादी या शुभ कार्यों में निमंत्रण के लिए किया जाता है। इस बार इसका इस्तेमाल शिक्षा के महापर्व में शामिल होने के लिए किया गया। इस पहल का सकारात्मक प्रभाव दिखा और परीक्षा केंद्रों पर विशेषकर महिलाओं की भागीदारी बढ़ी। समाज में बदलाव के लिए अभियान सास सुमित्रा मरकाम ने कहा कि पीले चावल मिलने पर उन्हें अहसास हुआ कि यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं है। यह समाज में बदलाव का एक बड़ा अभियान है। उनकी बहू हेमबती मरकाम ने भी साथ देने का निर्णय लिया। बहू हेमबती ने बताया कि उन्हें ऐसा लगा जैसे किसी शुभ अवसर पर बुलाया जा रहा है। परिवार का पूरा सहयोग मिला। दोनों के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। हर घर में फैलेगी शिक्षा की रोशनी जिला परियोजना अधिकारी साक्षरता वेणु गोपाल राव ने कहा कि सास-बहू की शिक्षा के प्रति ललक समाज की बदलती सोच को दर्शाती है। पीले चावल के निमंत्रण से इस महापरीक्षा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर शिक्षा को बढ़ावा देते रहेंगे, तो हर घर में शिक्षा की रोशनी फैलेगी।


