पानी को लेकर हरियाणा-पंजाब की जल्द होगी मीटिंग:दोनों राज्यों के CM होंगे शामिल; केंद्रीय मंत्री पाटिल बोले- हरियाणा को हक दिलाकर रहेंगे

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि हरियाणा को उसके हिस्से का पानी दिलाने के लिए अंतरराज्यीय मुद्दों को हल करने के लिए आने वाले दिनों में संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक की जाएगी। समस्याओं के हल होने से हरियाणा को उसके हक का पानी मिलेगा। केंद्रीय मंत्री पाटिल जिला पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय कार्यक्रम में राष्ट्रव्यापी अभियान जल शक्ति अभियान कैच द रेन-2025 के शुभारंभ के उपरांत संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी भी उपस्थित रहे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पहली बार इस कार्यक्रम को दिल्ली से बाहर मनाने के लिए कार्यक्रम के आयोजन के लिए जब हरियाणा के मुख्यमंत्री से पूछा गया तो उन्होंने तुरंत हां कर दी, क्योंकि वे जल का महत्व जानते हैं। जल संरक्षण और जलसंचय के लिए जन-जन में जागृति आए, इसके लिए नायब सिंह सैनी ने अपने राज्य बजट में भी बहुत से कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई है। हरियाणा को पानी की कमी से निजात दिलाएंगे
पाटिल ने कहा कि हरियाणा प्रगतिशील राज्य है, जो पानी की आपूर्ति के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर है। यहां बारिश भी कम होती है, ऐसे राज्य में आने वाले दिनों में पानी कमी न हो, इसकी चिंता सरकार के साथ-साथ नागरिकों को भी करने की आवश्यकता है। इसलिए जनभागीदारी के साथ-साथ केंद्र और हरियाणा सरकार मिलकर राज्य को पानी की कमी की समस्या से निजात दिलाने के लिए संकल्पबद्ध तरीके से काम करेंगे। इन जिलों के लिए सिंचाई योजना शुरू हुई यमुनानगर के गांव देवधर व बेगमपुर, जिला कैथल के गांव जुलानी खेडा, जिला भिवानी के गांव पहाड़ी, जिला महेंद्रगढ़ के गांव अकोली एवं गांव मंद्लाना में सौर शक्ति एकीकृत सूक्ष्म सिंचाई परियोजना का उद्घाटन किया गया। साथ ही, फिरोजपुर झिरका के 52 गांवों व 5 ढाणियों में जल वितरण में बढ़ोतरी के लिए रेनीवेल आधारित परियोजनाओं तथा पटौदी विधानसभा क्षेत्र के 24 गांवों व 9 ढाणियों में जल बढ़ोतरी के लिए नहर आधारित परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत पंचकूला में ठोस कचरा प्रबंधन के लिए 9 शेड्स, 103 सोखता गड्ढे तथा 21 सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का भी उद्घाटन किया। इनको मिला सम्मान
कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण के क्षेत्र में योगदान के लिए जल योद्धाओं को सम्मानित किया गया। प्रगतिशील किसान श्रेणी के तहत राजकुमार मेहरा, कुरुक्षेत्र से प्राकृतिक खेती के लिए कुशाल नेहरा, गांव सुखपुरा, यमुनानगर से फसल विविधीकरण और विकास चौधरी को तरावड़ी, करनाल से डीएसआर तकनीक के उपयोग के लिए सम्मानित किया गया। इसी तरह जल संरक्षण में सर्वश्रेष्ठ सरपंच के लिए भारती, पखाल, फरीदाबाद को ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए, रतनपाल सिंह, निरपुर राजपूत, नारनौल को तालाब के जीर्णोद्धार के लिए तथा जसमेर सिंह, सुल्तानपुर, करनाल को वर्षा जल संचयन प्रणाली के लिए सम्मानित किया गया। अटल भूजल योजना में इन्हे मिला सम्मान
इसी कड़ी में अटल भूजल योजना के तहत बेस्ट भू-जल सहेली के लिए रचना रामधारी, ब्रिर्थे बिहारी, कैथल को, सुमन, बैरान भिवानी को तथा गुरप्रीत कौर, जगमलेरा सिरसा को सम्मानित किया गया। सर्वश्रेष्ठ महिला स्वयं सहायता समूह श्रेणी के तहत पुष्पा, धौरंग, यमुनानगर, काजल शर्मा, मोरनी पंचकूला को जल भंडारण के लिए तथा सरिता देवी, नई बस्ती नलवी, कुरूक्षेत्र को जल संरक्षण के बारे में जागरूकता के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा, जल संरक्षण के लिए सर्वोत्तम ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियां श्रेणी के तहत, लाभ सिंह सरपंच, जंबा, कैथल को, प्रवेश कुमार, चेयरमैन, कल्याणा कुरूक्षेत्र को तथा विक्रमजीत कौर, चेयरपर्सन नीलोखेड़ी करनाल को सम्मानित किया गया। 2019 में शुरू हुआ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में 2019 में जल शक्ति अभियान की शुरुआत की गई। इस राष्ट्रीय अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण, तालाबों और जल स्रोतों का पुनरुद्धार, मानसून के पानी का पुनः उपयोग, विलुप्त हो चुकी नदियों के पुनरुद्धार जैसे महत्वपूर्ण प्रयासों पर आधारित है। मुख्यमंत्री सैनी के नेतृत्व में हरियाणा तालाब प्राधिकरण का गठन किया गया है, जो लोगों को प्राचीन तालाबों के पानी को उपचारित कर सिंचाई और अन्य कार्यों के लिए उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रहा है। यह कार्यक्रम भी इसी श्रृंखला का एक हिस्सा है। हरियाणा ने 500 गांवों का टारगेट फिक्स किया मुख्यमंत्री ने गिरते भूजल स्तर पर चिंता जाहिर कर चुके हैं। इसको लेकर जनवरी में हुई एक बैठक में सीएम ने पहले फेज के लिए 500 गांवों के भूजल को रिचार्ज करने का लक्ष्य तय किया है। साथ ही इसको पूरा करने के लिए एक टाइम भी फिक्स किया है। प्रधानमंत्री भी भूजल स्तर के नीचे गिरने पर चिंता जता चुके हैं। प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि भूजल का कम होना देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है और इस चुनौती से निपटने के लिए हम सबको मिलकर कार्य करना होगा। नदियों को जोड़ने पर हो रहा काम सीएम सैनी ने हांसी -बुटाना लिंक नहर को भी वाटर -स्टोरेज के लिए प्रयोग करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए हैं। CM ने प्रदेश में जल-ऑडिट से व्यापक जल -प्रबंधन करने के निर्देश दे चुके हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य से होकर गुजरने वाली नदियों को भी आपस में जोड़ने के लिए रोड-मैप तैयार करें। इससे बरसात के दिनों में बाढ़ से होने वाले नुकसान से बचने और निम्न भू-जल स्तर को ऊपर लाने में मदद मिलेगी। हरियाणा को क्यों मिला ये टास्क? हरियाणा में बीते कई वर्षों से भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। जिसको लेकर हरियाणा सरकार के साथ ही केंद्र सरकार भी बेहद चिंतित है। विपक्षी दल भी भूजल स्तर को संतुलित नहीं किए जाने को लेकर सरकार को घेर रहे हैं। विधानसभा के बजट सेशन में इस मुद्दे को लेकर विपक्षी विधायकों ने सरकार को घेरने की कोशिश की है। 10 सालों में हरियाणा के भूजल स्तर में जबरदस्त गिरावट आई है। अब तक 5.41 मीटर नीचे जा चुका है। यही कारण है कि प्रदेश के 107 ब्लॉक डार्क जोन की श्रेणी में पहुंच गए हैं। सरकार ये कर रही है 4 प्रयास.. 1. अटल भूजल योजना लागू की हरियाणा सरकार के जल स्तर बढ़ाने के प्रयास: हरियाणा सरकार की ओर से नीचे खिसक रहे भूजल और अत्यधिक जल दोहन को रोकने के लिए कार्य योजना तैयार की गई है। इससे प्रदेश के 14 जिलों की 1647 ग्राम पंचायत में अटल भूजल योजना लागू कर नीचे जाते भूजल स्तर को रोकने और जल स्तर को बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। 2. धान की सीधी बिजाई के लिए दे रही सब्सिडी प्रदेश सरकार द्वारा धान की परंपरागत रोपाई के बजाय सीधी बिजाई का विकल्प तैयार किया गया है। धान की सीधी बिजाई पर सरकार किसान को साढ़े चार हजार रुपए प्रति एकड़ मदद देगी, जबकि धान की बुआई नहीं करने वाले किसान को दोगुनी 8 हजार प्रति एकड़ की दर से अनुदान दिया जाएगा। 3. 13 जिलों में जल भराव क्षेत्र में किया सुधार हरियाणा के 13 जिले, रोहतक, झज्जर, सोनीपत, भिवानी, हिसार, जींद, चरखी दादरी, फतेहाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम, सिरसा, पलवल और नूहं में उप सतही वर्टिकल जल निकासी तकनीक के माध्यम से जल भराव क्षेत्र का उद्धार किया गया है। इनमें वर्ष 2022-23 में 25490 एकड़, 2023 24 में 78155 एकड़ और 2024 25 में 53167 एकड़ भूमि शामिल है। 4. धान के बजाय दूसरी फसलों पर फोकस कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने प्राकृतिक भूजल संसाधन के संरक्षण को लेकर फसल विविधीकरण कार्यक्रम शुरू किया है। पानी की अधिक खपत वाली धान की फसल की जगह मक्का, सूरजमुखी, कपास, सब्जियां, बाजरा और ग्रीष्मकालीन मूंग की ऑप्शनल फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। विधानसभा में 11 विधायकों ने उठाया ये मुद्दा प्रदेश की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी 11 विधायकों द्वारा गिरते भूजल स्तर के सवालों पर सदन में भी जवाब दे चुकी हैं। वर्टिकल ड्रेनेज तकनीक का उपयोग कर 2018-19 से जल भराव मुक्त करने का अभियान शुरू किया गया था, जिससे भूजल गुणवत्ता में सुधार हुआ है। इस अवधि के दौरान 108 करोड़ रुपए खर्च कर 26 हजार 110 एकड़ भूमि से जल भराव की समस्या दूर की गई है।

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