कोडरमा के जयनगर थाना क्षेत्र के तरवन गांव में एक महिला और उसके 4 वर्षीय बच्चे की हत्या के आरोपियों को सामाजिक दंड मिला है। जमानत पर रिहा होने के बाद गांव की पंचायत ने आरोपियों का सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला लिया है। घटना 27 अगस्त 2024 की है। आरोप है कि दिलीप यादव, उनकी पत्नी जसवा देवी और उनके छोटे पुत्र ने मिलकर सुमन देवी और उसके 4 वर्षीय बेटे की हत्या कर दी थी। आरोपियों ने दोनों के शव कुएं में फेंक दिए थे। इसके बाद घटना को छिपाने का प्रयास भी किया गया था। मृतका के पिता टीपन महतो ने जयनगर थाना में मामला दर्ज कराया था। तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। करीब 6 महीने बाद तीनों को जमानत मिल गई। होली से दो दिन पहले जेल से छूटकर वे लोग गांव लौट आए। गांव में पांच जातियों के समूह हैं। हर समूह का एक मुखिया है। 23 मार्च को इन पांचों समूहों के प्रमुखों ने इंद्रजीत यादव की अध्यक्षता में बैठक की। बैठक में सर्वसम्मति से तीनों आरोपियों के सामाजिक बहिष्कार का फैसला किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि न्यायालय से जमानत मिल गई है, लेकिन गांव के लोग उन्हें सजा जरूर देंगे। मंझले बेटे की भी हुई थी संदेहास्पद मौत बताते चलें कि दिलीप यादव के तीन पुत्र थे। इसमें पहले बेटे की बीमारी से मौत हुई थी। हालांकि वे शादीशुदा था, पर वह निःसंतान था। बड़े बेटे की मौत के बाद उसकी पत्नी अपने मायके चली गई और फिर दोबारा कभी अपने ससुराल नहीं आई। इधर मंझले बेटे उपेंद्र यादव की 2015 में सुमन देवी से शादी हुई। इसके बाद उनके 2 बेटे व एक बेटी हुई। 2021 में उपेंद्र की संदेहास्पद रूप से आग लगने से मौत हो गई। इसके बाद से दिलीप यादव, उनका छोटा बेटा व उनकी पत्नी लगातार सुमन को आए दिन प्रताड़ित करने लगे। ग्रामीणों की मानें तो सारा माजरा सम्पति से जुड़ा हुआ है। उपेंद्र के निधन के बाद दिलीप यादव व उनकी पत्नी नहीं चाहती थी कि उनके संपत्ति का हिस्सा सुमन देवी व उसके बच्चे को मिले। क्या थी पूरी घटना दिलीप यादव, राजेश यादव व उनकी मां जसवा देवी उपेंद्र की मौत के बाद से ही सुमन से लगातार कलह करती रहती थी। तरवन गांव के मुखिया के अनुसार, 27 अगस्त 2024 को दोपहर में राजेश ने अपने भतीजे (सुमन के छोटे पुत्र) को घरेलू विवाद में घर के बाहर बने सड़क पर पटक दिया था। वहीं, उसी रात उसने आसपास के लोगों को बताया कि उसकी भाभी सुमन देवी व उसका छोटा पुत्र घर से दूर एक कुएं में गिरे पड़े मिले हैं। उसने गुपचुप तरीके से दोनों का अंतिम संस्कार करना चाहा और इसमें आसपास के लोगों से सहयोग करने की अपील की। इसका लोगों ने विरोध किया और मामले की सूचना जयनगर पुलिस को दी। वहीं, मृतका के बड़े बेटे व बेटी को उसके नाना अपने साथ नानी घर ले गए, जहां उनका पालन पोषण हो रहा है।
गांव के किसी भी उत्सव में तीनों को शामिल न होने का फैसला इधर, रविवार को हुई बैठक में ग्रामीणों द्वारा यह फैसला लिया गया कि आज के बाद से गांव में होने वाले किसी भी उत्सव, शादी-विवाह या अन्य कार्यक्रमों में दिलीप यादव, उनकी पत्नी व उनके बेटे को शरीक नहीं होने दिया जाएगा और न ही उनके घर में होने वाले आयोजनों में गांव के कोई भी लोग शरीक होंगे। ग्रामीणों के फैसले के बाद से गांव से गायब हैं आरोपित इधर, रविवार को ग्रामीणों द्वारा सामाजिक बहिष्कार के फैसले के बाद से दिलीप यादव के घर पर ताला लगा हुआ है और पूरा परिवार लापता है।


