जवाहर कला केन्द्र की ओर से आयोजित दो दिवसीय मधुरम कार्यक्रम का गुरुवार आगाज हुआ। सांगीतिक विधाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों से कलाकारों ने समां बांधा। डॉ. भूमिका अग्रवाल ने भजनों और ग़ज़लों का गुलदस्ता सजाया। वहीं जय कुमार जवड़ा ने जयपुर घराने के कथक की प्रस्तुति देकर दाद बटोरी। कार्यक्रम की शुरुआत में मशहूर तबला वादन जाकिर हुसैन को श्रद्धांजलि दी गई। डॉ. भूमिका अग्रवाल ने ‘जानकी नाथ सहाय करे’ भजन से प्रभु के चरणों में शीश नवाते हुए अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। ‘मैं नहीं मेरा नहीं’ के साथ अन्य भजनों में डॉ. भूमिका ने ईश्वर की महिमा का बखान किया। इसके बाद महफिल में सुरीली गजल गूंजने लगी। ‘या खुदा कैसे जमाने आ गए, फैसले कातिल सुनाने आ गए’, ‘जब कली कोई मुस्कुराती है’ आदि ग़जलों ने श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। अंत में दादरा, ‘मोरा तुम बिन जियरा ना लागे’ प्रस्तुत कर डॉ. भूमिका ने वाहवाही लूटी। हारमोनियम पर रमेश मेवाल, तबले पर पुनीत अग्रवाल, की-बोर्ड पर एस.बबलू और सितार पर किशन कथक ने संगत की।
प्रवीण गंगानी के शिष्य जयपुर घराने के कथक नर्तक जय कुमार जवड़ा ने गणेश वंदना ‘गणपति विघ्न हरो’ से प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके बाद थाट, उपज, आमद, उठान, चक्रदार, तीहाईयां, परण द्वारा कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। फिर द्रुत लय में गत निकास लयकारी प्रस्तुत की। मीरा बाई के भजन ‘सांवरा गिरधारी’ पर उन्होंने अंतिम प्रस्तुति दी। तबले पर परमेश्वर लाल कथक, गायन पर सांवरलाल कथक, सितार पर किशन कथक ने संगत की वहीं पढ़ंत राजेन्द्र कुमार जवड़ा ने किया।


