गायत्री शक्तिपीठ बाड़मेर एवं शाति कुंज हरिद्वार की ओर से बाड़मेर आदर्श स्टेडियम में 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं संस्कार महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसको लेकर तैयारियां जोरों पर चल रही है। कुंड को ईटों से बनाकर उस पर मिट्टी और गोबर का लेप किया जा रहा है। इसको लेकर महिलाएं सहित बड़ी संख्या में गायत्री परिवार के लोग हुए है। रणवीर सिंह भादू ने कहा कि बीते एक माह से यज्ञशाला का काम चल रहा है। महिला शक्ति दूर दराज के गांवों से आकर हाथों से गोबर का लेप किया है। 22 को कलश यात्रा निकलेगी जिसमें 3000 से अधिक महिलाएं होगी। इसमें हमारे बैंड, घोड़े, रथ और झांकिया भी होगी। महिलाए कलश सिर पर धारण किए पैदल चलेगी। प्रत्येक पारी में एक हजार गायत्री यज्ञ में बैठेगे। रोजना 5-7 पारिया प्रतिदिन होगी। ऐसी उम्मीद हे कि रोजना 10 हजार लोग आहूतियां देंगे। 50 हजार लोगों को इन चार दिनों में यज्ञ का लाभ मिलेगा। 27 साल बाद महायज्ञ करवाया जा रहा है। भादू ने कहा कि यज्ञ करना बहुत जरूरी है। क्यों आज पूरा विश्व प्रदूषण से ग्रस्ति है। प्रदूषण शुद्धिकरण और आक्सीजन कम होती जा रही है। हम जो यहां पर आहूतियां देंगे उसमें तुलसी का पौधा, पीपल जैसे पौधों से कार्बनडाई ऑक्साइड नहीं निकलती है। हिमालय की जड़ी बूटिया, देशी गाय का घी से हवन किय जाएगा। इस पर्यावरण को शुद्ध करेगा। साथ लोगों के मानसिक आसैर मन की भी शुद्धि होगी। मन के अंदर शांति आएगी। वैचारिक क्रांति में भी बहुत महत्वपूर्ण योगदान होगा। महिलाओं का कहना है कि ईट लगाकर कुंड बनाया गया। इस पर चिकनी मिट्टी और गोबर लगाकर इस पर लेप किया जा रहा है। कोई भी शुभ कार्य होता है गोबर का लेप किया जाता है। ताकि इससे शुद्धता हो। इसलिए सारे आंगन और कुंड गोबर से तैयार करवाया है। मिट्टी कलश से निकलेगी मंगल यात्रा शक्तिपीठ बाड़मेर के व्यवस्थापक मंगलाराम विश्नोई ने बताया- बाड़मेर शहर में 27 साल बाद 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ व संस्कार महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जिसकी तैयारियों परिजनों की ओर से की जा रही है। उन्होंने बताया- 22 दिसंबर को सुबह 11 बजे हाई स्कूल मैदान से मंगल कलश यात्रा रवाना होकर स्टेशन रोड, अहिंसा सर्किल, किसान हॉस्टल, ओवरब्रिज होते हुए आदर्श स्टेडियम पहुंचेगी। बाड़मेर व आसपास के इलाकों से करीब 2500 माता-बहनें सिर पर कलश धारण कर यात्रा में भागीदार बनेगी। यात्रा आदर्श स्टेडियम पहुंचेगी तब संतो और आचार्यो की ओर कलशों का पूजन और आरती की जाएगी। रात को गायत्री परिवार की आठ सदस्यों की टोली की ओर से भजन कीर्तन किए जाएगे। शब्द क्रांति की प्रदर्शनी लगाएगी। यज्ञ और गायत्री उपसना क्यों की जाती है इसको लेकर प्रदर्शनी में दर्शाया जाएगा। महायज्ञ 23 से 25 दिसंबर रेवंत सिंह चौहान ने कहा कि महायत्र 23 से 25 दिसंबर तक सुबह साढ़े छ बजे से प्रज्ञा योग एवं ध्यान साधना से प्रोग्रामों की शुरूआत होगी। वहीं 23 दिसंबर सुबह साढ़े आठ बजे से देव शक्तियों का आह्वान पूजन व आहुतियों का क्रम चलेगा। प्रत्येक क्रम में 800 से 1000 तक आहुतियां दी जाएगा। यह क्रम लगातार रहेगा। प्रोग्राम में 24 दिसंबर को डॉ. चिन्मय पंड्या प्रति कुलपति देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्धार का विशेष उद्बोधन होगा। उद्बोधन के बाद 15 हजार दीपक ज्योत जलाई जाएगी। 108 कुंड पर 900 जने बैठेंगे रेवंत सिंह ने कहा कि एक पारी करीब एक घंटे से सवा घंटे होगी। इसमें 108 कुंड में 900 जने आहूतियां देंगे। जो लोग आएंगे उनको बारी-बारी से यज्ञ में बैठने का अवसर प्रदान किया जाएगा। महायज्ञ में कोई भी वीआईपी कल्चर नहीं है। सभी लोग कुंड में बैठकर आहूतियां प्रदान करेंगे। सुबह साढ़े आठ बजे से तीन बजे तक होगी। ज्यादा होगी तो पारिया ज्यादा चलेगी। कुंड में बैठने के लिए धोती कुर्ता पहनकर आए। परिस्थिति अनुसार अगर नहीं आते पायजामा में आ सकते है।


