कोलकाता रेप-मर्डर केस, मानसिक तनाव में थी पीड़ित:मनोचिकित्सक का दावा- लगातार 36 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती थी; मौत के एक महीने पहले मांगी थी मदद

कोलकाता के आरजी कर हॉस्पिटल में रेप और मर्डर केस की पीड़िता ट्रेनी डॉक्टर मानसिक तनाव में थी। मौत के एक महीने पहले उनसे प्रोफेशनल मदद मांगी थी। यह दावा कंसल्टेंट मनोचिकित्सक मोहित रणदीप ने किया है। बंगाली टीवी चैनल के इंटरव्यू में मोहित रणदीप ने दावा किया कि पीड़िता को लगातार 36 घंटे ड्यूटी करनी पड़ी थी। उसके साथ शिफ्ट अलॉटमेंट में भेदभाव होता था। उसने दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में कई गड़बड़ियां देखी थीं। इसके बाद उसे परेशान किया जा रहा था। मनोचिकित्सक ने बताया कि उन्होंने ट्रेनी डॉक्टर को कुछ सलाह दी थी और फॉलो-अप काउंसलिंग के लिए दोबारा आने को कहा था। लेकिन वह नहीं आई। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो मैं CBI के सामने गवाही देने के लिए तैयार हूं। आरजी कर हॉस्पिटल में 8-9 अगस्त की रात ट्रेनी डॉक्टर का रेप-मर्डर हुआ था। 9 अगस्त की सुबह डॉक्टर की लाश सेमिनार हॉल में मिली थी। CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने संजय रॉय नाम के सिविक वॉलंटियर को 10 अगस्त को अरेस्ट किया था। इस घटना के बाद कोलकाता समेत देशभर में प्रदर्शन हुए। बंगाल में 2 महीने से भी ज्यादा समय तक स्वास्थ्य सेवाएं ठप रही थीं। मामले की जांच CBI कर रही है। 222 दिन बाद पीड़िता का डेथ सर्टिफिकेट जारी हुआ
घटना के 222 दिन बाद कोलकाता म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (KMC) ने पीड़ित का डेथ सर्टिफिकेट जारी किया। 19 मार्च को हेल्थ सेक्रेटरी ने इसे पीड़ित के घर जाकर पेरेंट्स को सौंपा। इससे पहले 23 फरवरी को पीड़ित डॉक्टर के परिवार ने आरोप लगाया था कि कोलकाता नगर निगम (KMC) डेथ सर्टिफिकेट जारी नहीं कर रही है। जबकि पानीहाटी नगर पालिका बेटी के दाह संस्कार का सर्टिफिकेट जारी कर चुकी है। माता-पिता ने बताया था कि KMC अधिकारियों ने कहा है कि डेथ सर्टिफिकेट जारी करने की जिम्मेदारी आरजी कर अस्पताल की है। जबकि, अस्पताल प्रबंधन ने कहा है कि सर्टिफिकेट KMC जारी करेगा। CBI जांच पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने नई याचिका लगाने को कहा
कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर के रेप-मर्डर केस पर 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अगुवाई वाली बेंच ने स्वत: संज्ञान लेते हुए पीड़ित के पेरेंट्स को कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की अनुमति दे दी। परिवार की मांग है कि, इस मामले में CBI ने सही से जांच नहीं की। याचिका में मुख्य आरोपी संजय रॉय के अलावा अन्य आरोपियों के शामिल होने का पता लगाने के लिए आगे की जांच की मांग की गई। हाईकोर्ट के आदेश पर जांच बंगाल पुलिस से लेकर CBI को मिली थी
9 अगस्त की घटना के बाद आरजी कर अस्पताल के डॉक्टरों और पीड़ित परिवार ने मामले की CBI जांच की मांग की, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच के आदेश नहीं दिए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 13 अगस्त को जांच CBI को सौंपी गई। इसके बाद CBI ने नए सिरे जांच शुरू की। 3 को आरोपी बनाया गया, 2 को जमानत
आरोपी संजय रॉय के अलावा मामले में मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को भी आरोपी बनाया गया, लेकिन CBI 90 दिन के अंदर घोष के खिलाफ चार्जशीट दायर नहीं कर पाई, जिस कारण सियालदह कोर्ट ने 13 दिसंबर को घोष को इस मामले में जमानत दे दी। इसके अलावा ताला थाने के पूर्व प्रभारी अभिजीत मंडल को भी चार्जशीट दायर न करने के कारण जमानत दी गई। इससे पहले CBI ने 25 अगस्त को सेंट्रल फोरेंसिक टीम की मदद से कोलकाता की प्रेसीडेंसी जेल में संजय का पॉलीग्राफ टेस्ट किया था। अधिकारियों ने करीब 3 घंटे उससे सवाल-जवाब किए। संजय समेत 10 लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट हुआ था। इनमें आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष, ASI अनूप दत्ता, 4 फेलो डॉक्टर, एक वॉलंटियर और दो गार्ड्स शामिल थे।

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