छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी से निकाले गए B.Ed सहायक शिक्षकों ने घुटने के बल चलकर प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार से समायोजन की मांग की है। दरअसल, छत्तीसगढ़ विधानसभा की रजत जयंती के अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु प्रदेश को संबोधित कर रही थी। इस दौरान लोकतंत्र, स्वतंत्रता और आदिवासी सशक्तिकरण पर चर्चा हो रही हैथी। वहीं दूसरी ओर, प्रदेश में हजारों बर्खास्त आदिवासी बी.एड. प्रशिक्षित सहायक शिक्षक न्याय और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे थे। 101वें दिन भी जारी रहा संघर्ष इन शिक्षकों का संघर्ष आज 101वें दिन में प्रवेश कर गया। अपनी मांगों को लेकर इन शिक्षकों ने घुटनों के बल चलकर प्रदर्शन किया और सरकार से न्याय की गुहार लगाई। ये शिक्षक वर्षों की सेवा के बाद सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय के कारण अपनी नौकरियों से वंचित हो गए हैं। कमेटी की समय सीमा तय हो- प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि भले ही मांगों को लेकर कमेटी बना दी गई है, लेकिन ये कमेटी कब तक अपना फैसला देगी इस पर सरकार ने कुछ भी नहीं कहा है। वहीं अनिश्चितकालीन आंदोलन को आज कई दिन हो गए लेकिन कोई भी सरकारी नुमाइंदा या सरकार से कोई मंत्री और विधायक बर्खास्त किए गए शिक्षकों की पीड़ा सुनने नहीं पहुंचे। शिक्षकों ने साफ किया कि अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन को और उग्र करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि जल्द से जल्द समायोजन की प्रक्रिया शुरू की जाए। जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। इससे पहले सीएम को खून से लिखी थी चिट्ठी नौकरी से निकाले गए शिक्षकों ने इससे पहले खून से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लेटर लिखा था। उन्होंने सरकार से समायोजन की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि, वे लंबे समय से शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला तो उन्होंने यह कदम उठाया। 8 मार्च के सहायक शिक्षकों के आंदोलन का दूसरा चरण जारी है।


