विश्व रंगमंच दिवस की पूर्व संध्या पर संगोष्ठी व नाट्य प्रस्तुतियां होंगी

रांची | रंगमंच के सामाजिक प्रभाव और इसकी प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श करने के लिए रंगदर्पण नाट्य संस्था जेएफटीए स्टूडियो थिएटर में 26 मार्च को संगोष्ठी व 2 नाटकों का मंचन करेगा। कार्यक्रम की शुरुआत ‘सामाजिक परिवर्तन में रंगमंच का योगदान’ विषय पर संगोष्ठी से होगी, जिसमें बतौर मुख्य वक्ता शिक्षाविद्, नाटककार व फिल्मकार डॉ. विनोद कुमार और सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड के परफॉर्मिंग आर्ट्स विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शाकिर तसनीम व वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार बादल अपने विचार साझा करेंगे। यह संगोष्ठी रंगमंच की सामाजिक भूमिका, उसकी संभावनाओं और वर्तमान परिदृश्य में उसकी प्रासंगिकता पर केंद्रित होगी। रंगदर्पण के अध्यक्ष डॉ. कमल बोस व सचिव डॉ. अनिल ठाकुर ने बताया कि संगोष्ठी के बाद दो नाटकों का ‘नींद क्यों रात भर नहीं आती’ का मंचन होगा, जिसके लेखक सुरेंद्र वर्मा व निर्देशक अशोक गोप हैं। इसके बाद धर्मवीर भारती के प्रसिद्ध नाटक ‘अंधा युग’ के अंतिम अध्याय का मंचन होगा। इसके निर्देशक डॉ. शाकिर तसनीम हैं।

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