स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 के तहत शहरों की स्वच्छता रैंकिंग के लिए सर्वे शुरू हो गया है। केंद्र से लुधियाना पहुंची टीम ने सर्वे कर निगम अफसरों से डिटेल प्रोग्रेस रिपोर्ट ली है। अप्रैल में रैंकिंग जारी होने की उम्मीद है लेकिन निगम लुधियाना की 5 चुनौतियां हल करने में निगम अफसर नाकाम रहे हैं। शहर में डोर टू डोर कलेक्शन, 24 घंटे पानी, कूड़े के पहाड़, डेवलपमेंट के काम, सफाई व्यवस्था अभी भी सवालों के घेरे में है। केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 के तहत शहरों की स्वच्छता रैंकिंग के लिए सर्वे कराया जाता है। इसके लिए केंद्र से एक टीम लुधियाना पहुंची है। टीम ने सर्वेक्षण शुरू कर दिया। टीम ने निगम अफसरों से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, गीला-सूखा कूड़ा निस्तारण, सफाई व्यवस्था, हॉर्टीकल्चर वेस्ट निस्तारण, डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, शौचालय आदि विषयों पर रिपोर्ट ली है। निगम अफसरों ने कूड़े के पहाड़ व हॉर्टीकल्चर वेस्ट निस्तारण करने समेत कई मामलों में प्रोजेक्ट के टेंडर होने की जानकारी टीम को दी है लेकिन पिछले तीन दशक में कूड़े के पहाड़ घटने के बजाये बढ़े हैं। ताजपुर डंप साइट पर 19 लाख मीट्रिक टन कूड़ा मुंह चिढ़ा रहा है। यह हाल तब है जब पंजाब का सबसे बड़ा नगर निगम लुधियाना है लेकिन अफसरों की मॉनीटरिंग में लापरवाही किसी से छिपी नहीं है। दो साल से नगर निगम का बोर्ड नहीं होने के कारण कमान निगम अफसरों के हाथों पर थी लेकिन कई प्रोजेक्ट पर सवाल उठने के साथ ही अफसरों की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही है। डोर टू डोर कलेक्शन नहीं निगम क्षेत्र में डोर टू डोर कलेक्शन सरकारी व्यवस्था के तहत नहीं होता है। प्राइवेट कारिंदे घरों से कूड़ा एकत्र करते हैं। यह कूड़ा शहर में निगम के डंप पॉइंट पर पहुंचता है। यहां से निगम के वाहनों से कूड़ा डंप साइट पर पहुंचता है। बता दें कि लुधियाना में डोर टू डोर कलेक्शन के लिए प्राइवेट कंपनी ने काम शुरू किया था लेकिन कंपनी कर्मचारियों पर आरोप लगने के बाद प्रबंधन ने हाथ खींच लिए थे। इसके बाद से ये काम प्राइवेट कारिंदे कर रहे हैं जिस कारण मानक के तहत यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। 2023 में 39वां स्थान स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 में लुधियाना को देश में 39वां स्थान मिला था। जबकि मुल्लांपुर दाखा नगर परिषद को उत्तर भारत का ‘स्वच्छ शहर’ घोषित किया गया था। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित समारोह में मुल्लांपुर दाखा को यह पुरस्कार दिया गया था। 2022 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में लुधियाना को 40वां स्थान मिला था। शौचालयों पर ताले लगे हैं निगम ने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत नए शौचालय बनाए थे। इसमें से कुछ शौचालय संचालित हो रहे हैं जबकि कुछ पर ताला लगा है। दो साल पहले हंबड़ा रोड पर शौचालय में चोरी हो गई थी जिसके बाद से उसमें ताला लगा है। वहीं पुराने स्टेडियम में बने शौचालय में ताला लगा होने की शिकायतें आ रही हैं। निगम अफसर हर बार शौचालय खुलवाने के दावे करते रहे लेकिन ताला नहीं खुला। चौड़ा बाजार समेत शहर के कई वार्डों में नए शौचालय की जरूरत है। यही नहीं, आरआरआर सेंटर को कूड़ा निस्तारण के लिए जगह दो दे दी लेकिन शौचालय की सुविधा नहीं दी। यहां लड़कियां भी काम करती हैं जिन्हें परेशानी होती हैं। सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं निगम क्षेत्र में 95 वार्ड हैं जिसमें कुछ वार्डों में सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं है। निगम के चुनाव के बाद पार्षदों की ओर से लगातार सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। पार्कों से हार्टीकल्चर वेस्ट ट्रैक्टर ट्राली पर ले जाया जाता है लेकिन उसे ढका नहीं जाता है। कूड़ा वापस सड़क पर बिखर जाता है। कर्मचारियों की अनुपस्थिति को लेकर भी शिकायतें मिल रही हैं जिस पर मेयर इंद्रजीत कौर व कमिश्नर आदित्य डेचलवाल ने जोनल कमिश्नरों को जांच के लिए निर्देशित किया है। कूड़ा घटने के बजाए बढ़ रहा 95 वार्ड से रोजाना 1100 मीट्रिक टन कूड़ा उत्पन्न होता है। कूड़े का निस्तारण न होने पर एनजीटी ने निगम पर 100 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था। निगम ने कूड़े के निस्तारण के लिए कई योजनाएं तैयार की लेकिन वे बीच में ही दम तोड़ गईं। ताजपुर डंप साइट पर 35 फीट तक कूड़े के पहाड़ बन गए हैं। 2020 में ताजपुर डंप साइट पर 12 लाख टन कूड़ा था जो निस्तारण न होने से 19 लाख मिट्रिक टन हो चुका है। निगम ने कूड़े से चारकोल बनाने की योजना बनाई लेकिन अभी तक शुरू नहीं हो पाई।


