शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर आरटीए विभाग के एमवीआई दफ्तर में वाहनों की पासिंग को लेकर 2 साल से फजीवाड़ा चला आ रहा था। विभागीय अफसरों तक शिकायतें पहुंचने पर जांच का हवाला देकर मामला रफा-दफा कर दिया जाता रहा। रोजाना करीब 200 वाहनों को 8 घंटे में चेक कर पासिंग करने के साथ ही फिटनेस सर्टिफिकेट दिया जाता रहा जबकि एक वाहन की चेकिंग में 20 मिनट जरूरी हैं। विजिलेंस ने गड़बड़ियों का क्लू मिलने के बाद अचानक एमवीआई दफ्तर में रेड कर फाइलें जब्त कर ली है। आरटीए विभाग के सूत्रों की मानें तो दोपहर करीब 3.30 बजे विजिलेंस की टीम अचानक ही एमवीआई दफ्तर पहुंचकर पूछताछ शुरू करते हुए फाइलें जब्त की। वहीं एजेंटों को इसकी भनक मिलते ही मौके से भाग निकले। वििजलेंस की इस कार्रवाई से आरटीए विभाग की सभी ब्रांचों में हड़कंप मचा हुआ है। गौर हो कि 2 साल पहले भी वििजलेंस छापेमारी करके फाइलें उठा ले गई थी हालांकि तब कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी सिर्फ एमवीआई का ट्रांसफर कर दिया गया था। एमवीआई दफ्तर के आसपास घूमने वाले 6 एजेंट वििजलेंस की रडार पर हैं जिनका काम वाहनों को पास कराने के बाद मोटी रकम वसूलना है। इन एजेंटों का सरगना मर्सिडीज गाड़ी में दफ्तर आता है। इसी के अंडर 5 एजेंट काम करते हैं। एजेंट एमवीआई दफ्तर व आसपास सीसीटीवी कैमरा न होने का फायदा उठाते है। सूत्रों की मानें तो चेकिंग दिन में होती हैं, लेकिन पासिंग रात में की जाती है। रात में काम करने का सिलसिला एमवीआई दफ्तर ही नहीं आरटीए विभाग के दूसरे विभागों में भी चल रहा है। आईपी एड्रेस ट्रेस किया जाए तो सारा काला कारनामा सामने आ जाएगा। एमवीआई दफ्तर में कोई क्लर्क व डाटा एंट्री ऑपरेटर तक नहीं लगाया गया है। फिर भी सारे काम कैसे निपटाए जा रहे, यह भी बड़ा सवाल है।


