किलकारी पालना घर की हालत खस्ता प्रशासनिक योजनाओं पर सवाल उठे

भास्कर न्यूज| नारायणपुर जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कलेक्टोरेट परिसर में स्थापित किलकारी पालना घर अब केवल नाममात्र का रह गया है। यह पालना घर उन कामकाजी और दूर-दराज से आने वाली ग्रामीण महिलाओं के लिए बनाया गया था, जो अपने छोटे बच्चों के साथ सरकारी कार्यों के लिए कलेक्टोरेट आती हैं। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि यह सुविधा केंद्र खुद देखरेख और रखरखाव के अभाव में बदहाली का शिकार हो चुका है। पालना घर में बच्चों के खेलने के लिए लगाए गए झूले पूरी तरह से टूट चुके हैं। खेलने के लिए रखे गए खिलौने कबाड़ में तब्दील हो गए हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि छोटे बच्चों के लिए न तो भोजन की कोई उचित व्यवस्था है और न ही नाश्ते का प्रबंध है। नारायणपुर जिला नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण यहां के आदिवासी ग्रामीण काफी पिछड़े हुए हैं। कई गांव अभी भी सड़क मार्ग से पूरी तरह से नहीं जुड़े हैं, जिसके चलते ग्रामीणों को प्रशासनिक कामों के लिए लंबी दूरी तय करके जिला मुख्यालय आना पड़ता है। खासतौर पर महिलाएं अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर पैदल चलकर कलेक्टोरेट पहुंचती हैं। ऐसे में प्रशासन ने महिलाओं की सुविधा के लिए पालना घर स्थापित किया था, लेकिन अब यह केवल नाम के लिए रह गया है। यहां आने वाली महिलाओं ने बताया कि पालना घर में अक्सर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं रहता। ऐसे में महिलाओं के लिए यह किसी काम का नहीं रह जाता। जब प्रशासनिक मुख्यालय के भीतर ही इस तरह की अव्यवस्था देखने को मिल रही है, तो पूरे जिले की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। पालना घर की बदहाल स्थिति ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि कलेक्टोरेट के भीतर स्थित एक महिला और बाल केंद्र की यह हालत है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित आंगनबाड़ियों की स्थिति क्या होगी, यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। महिलाओं और छोटे बच्चों की सुविधा के लिए बनाए गए इस पालना घर की दुर्दशा यह दर्शाती है कि प्रशासनिक योजनाएं केवल कागजों पर ही चल रही हैं। जमीनी हकीकत यह है कि जिन महिलाओं और बच्चों को इसका लाभ मिलना चाहिए था, वे अब भी परेशान हैं। यदि प्रशासन समय रहते इस ओर ध्यान नहीं देता, तो यह एक और सरकारी योजना की विफलता का उदाहरण बन जाएगा। जब इस मामले को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी लुपेंद्र महिनाग से सवाल किया गया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि पालना घर की हालत सही नहीं है। उन्होंने कहा, “यह पालना घर दूर-दराज से आई महिलाओं और कामकाजी महिलाओं के लिए बनाया गया था। यह एक छोटे आंगनबाड़ी केंद्र की तरह काम करता है। यहां जो खिलौने मौजूद हैं, वे काफी पुराने हैं और टूट चुके हैं।

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