बैतूल के चिचोली कस्बे के करीब मां चंडी दरबार के प्रबंधन का विवाद गहराता जा रहा है। गुरुवार को इस मामले में मंदिर समिति की ओर से हाई कोर्ट में अपील दायर करने का फैसला किया गया। इसके लिए हुई बैठक में प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और मंदिर समिति के सदस्य मौजूद थे। समिति और ग्रामीण इस मंदिर को निजी स्वामित्व में देने का विरोध कर रहे हैं। तहसीलदार चिचोली अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि बैठक में मां चंडी दरबार समिति ने उच्च न्यायालय जबलपुर की रिट याचिका के आदेश के विरुद्ध अपील करने का फैसला किया है। यह बैठक जनपद पंचायत चिचोली के सभा कक्ष में दोपहर तीन बजे आयोजित हुई, जिसमें, जनपद सीईओ राजोरिया, जनपद सदस्य प्रमिला उइके, हल्का पटवारी टिकमे, सरपंच संतोष टेकाम, नोडल अधिकारी सहित समिति के सदस्यों और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। सरपंच संतोष टेकाम ने बैठक में कहा कि मां चंडी देवी दरबार आदिवासी समाज की कुल देवी का स्थल है, जिसकी स्थापना राजा इल और उनकी पत्नी ने की थी। यह स्थान आदिवासी समाज के धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र है और इसे किसी निजी स्वामित्व में देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ पिटिशन दायर करने के लिए समिति पूरी तरह से तैयार है। 11 सदस्यीय समिति का गठन बैठक में प्रशासनिक समिति ने भी अपने पक्ष रखे। रिपोर्ट के अनुसार, मां चंडी दरबार के प्रबंधन के लिए 11 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति के पास मंदिर की देख-रेख, दान-दक्षिणा और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी है। प्रशासन ने बताया कि वर्तमान में इस समिति के पास दो बैंक खातों में कुल 40,38,534 रुपए जमा हैं। 1998 में मंदिर का पंजीकरण मध्यप्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत हुआ था। तहसीलदार चिचोली के आदेशानुसार वशिष्ठ दुबे को मंदिर के पुजारी के रूप में नियुक्त किया गया है, जो वर्तमान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि शांति व्यवस्था और लोकहित को ध्यान में रखते हुए मंदिर का प्रबंधन समिति के पास ही रहना चाहिए। बता दें कि यह प्रसिद्ध मंदिर जिस जमीन पर है।उसका मालिकाना हक हरिराम नाम के व्यक्ति का है। इसी आधार पर हाईकोर्ट का फैसला आया था। प्रशासन ने इस मामले को हल करने धर्मस्व विभाग से भी मार्गदर्शन मांगा था, लेकिन यह अब तक नहीं मिल सका है। प्रशासन और मंदिर समिति चाहती है कि मंदिर सार्वजनिक हित का स्थान है। इसलिए इस पर किसी एक व्यक्ति का नियंत्रण नहीं होना चाहिए।


