जल जीवन मिशन के तहत गांवों में हर घर नल से जल पहुंचाने की योजना अधूरी रह गई। फतेहपुर प्रखंड के बिंदापाथर गांव में 6 जल टंकी और 2 जल मीनार बनाई गई थी। इनमें से 4 जल टंकी और 2 जल मीनार बंद पड़ी हैं। इससे ग्रामीणों को भारी पेयजल संकट झेलना पड़ रहा है। इस योजना पर करीब 2 करोड़ 55 लाख रुपए खर्च हुए थे। लेकिन कहीं ड्राई बोरिंग में मीनार लगा देने, कहीं मोटर, सेंसर और स्विच खराब होने से जल आपूर्ति ठप हो गई। गांव के करीब 3 हजार लोग पानी के लिए परेशान हैं। चापाकल और कुओं का सहारा लेना पड़ रहा है। मार्च-अप्रैल में गर्मी बढ़ने पर हालात और बिगड़ सकते हैं। विभाग के अनुसार, जल टंकी और मीनारों की मरम्मत के लिए करीब 4 लाख रुपए की जरूरत है। लेकिन विभाग की लापरवाही से ग्रामीणों को एक साल से पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है। गादी टोला में 16 हजार लीटर की बनी थी टंकी बिंदापाथर के गादी टोला में 2021-22 में 16 हजार लीटर क्षमता की जल टंकी बनी थी। इस पर 55 लाख रुपए खर्च हुए थे। लेकिन, मोटर पैनल खराब होने से एक साल से पानी की सप्लाई बंद है। अप्रैल-जून 2023 में मोटर के कुछ पार्ट जल गए थे। ग्रामीणों के अनुसार, नया मोटर लगाने में 55 हजार रुपए लगेंगे। पुराने मोटर की मरम्मत 15-20 हजार रुपए में हो सकती है। ग्रामीण धनंजय गोराई ने बताया कि संवेदक को 5 साल तक जल टंकी की देखरेख करनी होती है। लेकिन एक साल से टंकी खराब है और संवेदक ने सुध तक नहीं ली। बोर्ड पर मोबाइल नंबर भी नहीं लिखा है, जिससे सूचना नहीं दी जा सकती। ग्रामीणों ने जल्द मरम्मत नहीं होने पर उपायुक्त कार्यालय में आवेदन देने की बात कही है। 25 चापाकल में से आधे से अधिक खराब, दूर से पानी लाने की विवशता गांव के एक टोले में 3 साल पहले 5 हजार लीटर क्षमता की जल मीनार बनी थी। इस पर 4 लाख रुपए खर्च हुए थे। लेकिन 20 हजार रुपए की मोटर खराब होने से यह भी बंद पड़ी है। गांव में 25 चापाकल हैं, जिनमें से आधे से ज्यादा खराब हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाएं दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। ग्रामीण सुभाष गोराई, हरिसदन गोराई, मागाराम गोराई और जगबन्धु गोराई ने बताया कि एक साल से दोनों जल टंकी बंद हैं। इससे पानी का भराव नहीं हो पा रहा। जिला प्रशासन से जल्द मरम्मत कराने की मांग की गई है। ठेकेदार को दी है सूचना: जेई फतेहपुर प्रखंड के पेयजल विभाग के जेई शेखर सुमन ने बताया कि ठेकेदार को सूचना दे दी गई है। उसे कहा गया है कि गर्मी से पहले सभी खराब जल टंकी और मीनारों को ठीक किया जाए, ताकि ग्रामीणों को परेशानी न हो।


