भास्कर न्यूज | चाईबासा आदिवासी उद्यमियों और व्यवसायियों की अग्रणी संस्था ट्राइबल इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की ओर से 27 मार्च 25 गुरुवार को पंचायत भवन, मतकमहातु चाईबासा में एक दिवसीय महुआ खाद्य प्रसंस्करण पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्राइबल इंडियन चैंबर आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, चाईबासा के अध्यक्ष रामेश्वर बिरूवा ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में कई तरह के वन उपज बहुतायत में पाए जाते हैं और जिन्हें चुनकर या तोड़कर हम सिर्फ बेच देने का काम करते हैं लेकिन इन खाद्य पदार्थों को अगर हम प्रसंस्कृत करके एक सही लेवलिंग करके मार्केटिंग करते हुए बेचने का काम करें तो हमें कई ज्यादा मुनाफा होगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईआईटी मद्रास के शोधकर्ता इतिहासकार इंद्रानील प्रामाणिक उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि भारत सहित पूरी दुनिया आयुर्वेद की ओर तेजी से बढ़ रही है, लोग अंग्रेजी दवाओं के लंबे दुष्प्रभाव के कारण अब आयुर्वेदिक दवाओं पर अपनी विश्वसनीयता बढ़ा रहे हैं, साथ ही मूनगा जिसे अंग्रेजी में मोरींगा भी कहा जाता है कि भी आयुर्वेदिक दवाओं में इस्तेमाल व खाद्य पदार्थ में इस्तेमाल से लोगों को कई गंभीर बीमारियों के इलाज में सफलता प्राप्त हो रही है। इसी कड़ी में वर्तमान में महुआ की विश्वसनीयता बढ़ गई है, महुआ का इस्तेमाल कई दवाइयों के साथ विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों में हो रहा है। महुआ से अचार, लड्डू , शीतल पेय सहित कई तरह के व्यंजन बनाए जा सकते हैं।


