निगम बजट : वार्ड नहीं हलकावाइज फंड खर्चने का एजेंडा, पार्षद खफा

^एजेंडा व बजट पढ़ने का टाइम काफी कम मिला है। जिस तरह से मेयर बनाया गया वैसे ही बजट पास कराने की तैयारी पहले ही हो चुकी है। एक पार्षद को बोलने के लिए कम से कम 5 मिनट का समय देना चाहिए मगर मीटिंग को 30 मिनट का समय दिया गया। इसके बाद जनरल मीटिंग जो रखी गई उसके लिए भी टाइम कम मिलेगा। यह मुद्दा भी हाउस की मीटिंग में उठाना चाहिए कि उसी सीट पर 15-15 साल से निगम-ट्रस्ट के ये अफसर यहां कर क्या रहे हैं। – अश्विनी कालेशाह, कांग्रेस पार्षद वार्ड-48 ^हाईकोर्ट में पहले ही मेयरशिप को लेकर केस चल रहा है। ऐसे में हाउस की मीटिंग बुलाना गलत है। फिलहाल इन्होंने क्या बजट तैयार किया और कौन सा एजेंडा बनाया यही जानें। किसी भी पार्षद को बातचीत करने के लिए नहीं बुलाया। अंदरखाते अफसरों से मिलकर खुद ही सारा कुछ तैयार कर लिया। सिर्फ इनकम शो कर दी है। निगम ने ही सब करना है तो विकास कामों के लिए मीटिंग बुलाने की जरूरत क्या है। पार्षद सिर्फ कूड़ा उठवाने व सीवर साफ करवाने तक सीमित नहीं हैं। -विकास सोनी, कांग्रेस पार्षद वार्ड- 52 ^बजट एजेंडा दोनों समझ से परे हैं। पार्षदों से कुछ पूछा तो है नहीं निगम अफसरों ने सबकुछ खुद ही तय कर लिया। हाउस की मीटिंग में पास क्या कराना है। पहले ही सबकुछ क्लियर है कि क्या और कैसे करना-करवाना है। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किस वार्ड को विकास के लिए कितना पैसा मिलेगा। -इंदरजीत पंडोरी, अकाली पार्षद वार्ड-43 ^हाउस की मीटिंग बुलाने से पहले ही डरे हुए हैं। इसलिए सिर्फ 30 मिनट का समय बजट पास कराने के लिए दिया है। पार्षदों को पता है कि उनके वार्ड में कितने सीवरमैन की शॉर्टेज है। मनमर्जी तरीके से आउटसोर्स पर भर्ती करना डाल दिया गया। ऐसा लग रहा कि मेयर अपना खुद का हाउस (घर) चला रहे। सभी पार्षदों की रजामंदी से निगम हाउस चलता है। -सतीश बल्लू, कांग्रेस पार्षद वार्ड-77 ^वेस्ट हलका में 20 वार्ड हैं। विकास कामों के लिए जो बजट दिया जा रहा, उसमें कुछ नहीं होगा। जब जनरल मीटिंग बुलाई थी तो बड़े टेंडर का प्रस्ताव क्यों नहीं रखा गया। बजट तैयार करने वालों ने यह नहीं देखा कि सरकार डवलपमेंट पर फोकस कर रही। लेकिन निगम अफसर अपने खर्चे बढ़ा रहे हैं। -नीतू टांगरी, कांग्रेस पार्षद वार्ड-64 ^प्रस्ताव पास कराएंगे कि दरबार साहिब वाल्ड सिटी के आस-पास जो वार्ड हैं, वहां 2 शिफ्टों में कूड़ा उठान कराया जाए। सीवरेज सफाई के लिए छोटी मशीनें दी जाएं। आउटसोर्स पर मुलाजिम रखने का फैसला सराहनीय है। डवलपमेंट कामों के लिए कम फंड की बात जो सामने आ रही ऐसा कुछ नहीं है। बाद में दोबारा मीटिंग बुलाई जाएगी तो भी अलग से फंड विकास कामों पर खर्च करने के लिए दिए जाएंगे। -विक्की दत्ता, आप पार्षद वार्ड-68 ^निगम अफसरों को चाहिए कि खर्चे सीमित करें। विकास कामों पर अधिक फोकस होना चाहिए। इसके लिए निगम कमिश्नर-मेयर से बात की जाएगी। पार्षदों को मीटिंग में बोलने का हक है। ऐसे में टाइम बढ़ाया जाए इसके लिए भी बोलेंगे। डवलपमेंट काम के लिए किस वार्ड को कितना मिलेगा यह भी क्लियर होना चाहिए। ​सारी बातें बातचीत करके हल निकाला जाएगा। बजट को काफी टेक्निकल बनाया गया है, यह किसी को समझ ही नहीं लग रहा। -विराट देवगन, आप पार्षद, वार्ड 66 ^विकास काम करवाने के लिए हलकावाइज बजट रखा गया है। वार्डों के हिस्से जो अमाउंट आना है वह ऊंट के मुंह में जीरे की तरह होगा। वार्डवाइज फंड दिया जाना चाहिए। जिससे पार्षदों को पता चल सके कि उनके विकास कामों के लिए उन्हें कितना दिया जा रहा है। ऐसे तो बाद में मनमर्जी तरीके से फंड जारी कर दिए जाएंगे। अपनी पार्टी को अधिक फायदा पहुंचाया जाएगा। जो नीति अंदरखाते तैयार की गई वह गलत है। सारा कुछ पारदर्शी होना चाहिए। -श्रुति विज, बीजेपी पार्षद वार्ड-10 बीजेपी-कांग्रेस व अकाली पार्षदों ने कहा कि बजट डीसीएफए मनु शर्मा तो एजेंडा तैयार करने की जिम्मेदारी असिस्टेंट कमिश्नर राजिंदर कुमार को दी गई थी। मगर उच्च अफसरों ने इस तरफ ध्यान देना जरूरी नहीं समझा कि निगम के खर्चे कम करके विकास कामों का बढ़ा दिया जाए। एजेंडे में जो विकास काम दिखाए गए, वह हलकावाइज बनाना गलत है। बजट में निगम का सिर्फ इनकम शो की गई है, खर्चे किस मद में कितने किए जाएंगे यह कुछ नहीं है। भास्कर न्यूज | अमृतसर निगम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 459.45 करोड़ का बजट शो किया है। 29 मार्च को बजट की मीटिंग दोपहर 3 से 3.30 बजे तक होगी। इसके बाद विकास से जुड़े मुद्दे पर जनरल मीटिंग की जाएगी। 85 वार्डों के लिए विकास कामों को लेकर जो खर्च किया जाना है वह 9.18 करोड़ रुपए है। उसमें भी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस वार्ड को कितनी राशि दी जाएगी। चूंकि हलकावाइज फंड खर्चने के लिए एजेंडा तैयार हुआ है। सिविल के काम 50 हजार से 1.42 लाख तक तो स्ट्रीट लाइट को 2.45 से 3.50 लाख और सीवरेज-पैच वर्क, सुपर सकर मशीनें खरीदने व अन्य के लिए 5 से 7 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। ऐसे में हर वार्ड के पार्षदों के हिस्से में जो ग्रांट आएगी वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान होगी। जल आपूर्ति लाइन बदलने और अन्य मरम्मत कार्य, मिनी सुपर सकर मशीन, सीवरेज लाइन-मेनहोल बदलने व रिपेयर के लिए हलकावाइज 35-35 लाख जो 5 हलका के लिए 5.25 करोड़ रुपए, स्ट्रीट लाइट के लिए 2.44 करोड़ तो पैच वर्क को 1.49 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। मेयर ने अपनी पार्टी के पार्षदों को बुलाकर बातचीत कर ली मगर दूसरे दलों के पार्षदों को बुलाना जरूरी नहीं समझा। 30 मिनट की जो बजट मीटिंग रखी गई है, इसका कोई औचित्य नहीं बनता। एक पार्षद को बोलने के लिए कम से कम 5 मिनट देने चाहिए। इसके बाद जनरल मीटिंग बुलाई गई उसके लिए भी उतना ही समय ही दिया है। जब पार्षदों को बोलने का मौका ही नहीं मिलेगा तो निगम कमिश्नर से मिलकर बजट-एजेंडा दोनों ही पास करा लेना चाहिए। अवर्डा कंपनी ने कूड़ा कलेक्शन-डिस्ट्रीब्यूशन-बॉयोरेडिमेशन का काम न करने के लिए करीब एक माह पहले नोटिस दे दिया है। ऐसे में इन तीनों कामों के लिए अलग-अलग टेंडर लगाए जाने थे। जिसका रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) तक तैयार नहीं किया जा सका है। शहर को जिस चीज की जरूरत है, उस पर अफसरों का ध्यान नहीं है। जनरल मीटिंग में यह मुद्दा पास कराया जा सकता था। पांचों हलकों में जल आपूर्ति लाइन बदलने और अन्य मरम्मत कार्य, मिनी सुपर सकर मशीन, सीवरेज लाइन-मेनहोल बदलने व रिपेयर के टोटल 5.25 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। हलका वेस्ट में 20 वार्ड हैं और प्रत्येक वार्ड 5 लाख रुपए मिल सकते हैं। इसी तरह सेंट्रल और साउथ सहलके में 14-14 वार्ड हैं जहां हरेक वार्ड को 7.14 लाख तो ईस्ट हलके में 18 वार्ड जहां प्रत्येक वार्ड को 5.55 लाख मिल सकते हैं। इसी तरह नॉर्थ हलके में 17 वार्ड हैं जहां हरेक वार्ड को 5.88 लाख रुपए मिल सकते हैं। सिविल विभाग से जुड़े कामों के लिए सभी हलकों में 1.49 करोड़ दिए जाएंगे। नॉर्थ हलका के विभिन्न क्षेत्रों में सीसी पैच वर्क के साथ सड़कों-गलियों की मरम्मत व रखरखाव 9.90 लाख खर्च होंगे जहां हर वार्ड लगभग 58.82 हजार रुपए मिलेंगे। साउथ में इसी काम पर 9.95 लाख रुपए खर्चे जाएंगे जहां प्रत्येक वार्ड लगभग 71.42 हजार रुपए मिल सकते हैं। ईस्ट में 9.96 लाख रुपए खर्च होंगे जहां हर वार्ड को लगभग 55 हजार रुपए मिल सकते हैं। वेस्ट हलका में 9.98 लाख रुपए खर्च होंगे जहां प्रत्येक वार्ड को लगभग 50 हजार रुपए मिल सकते हैं। सेंट्रल हलका में 9.94 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे जहां हर वार्ड को लगभग 71.42 हजार रुपए मिल सकते हैं। वहीं पांचों हलकों में स्ट्रीट लाइट्स से जुड़े कामों पर टोटल 2.44 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

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