‘भारतीय ज्ञान परंपरा और हिंदी साहित्य’ विषय पर व्याख्यान

अमृतसर | बीबीके डीएवी कॉलेज फॉर वुमेन में महर्षि दयानंद सरस्वती की 201वीं जयंती पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। उद्घाटन समारोह में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के चांसलर प्रोफेसर डॉ. हरमोहिंदर सिंह बेदी मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की शुरुआत वेद मंत्रों और डीएवी गान के साथ दीप प्रज्वलन कर हुई। प्राचार्या डॉ. पुष्पिंदर वालिया ने अतिथियों का स्वागत पौधे भेंट कर किया। डॉ. वालिया ने अपने भाषण में स्वामी दयानंद के दूरदर्शी नेतृत्व को श्रद्धांजलि दी। मुख्य अतिथि डॉ. बेदी ने स्वामी दयानंद की शिक्षाओं की कालातीत प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी का दृष्टिकोण अतीत, वर्तमान और भविष्य तीनों के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने अंधविश्वास मिटाने और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए स्वामी जी के प्रयासों की सराहना की। अमृतसर|गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और हिंदी साहित्य’ विषय पर विशेष व्याख्यान हुआ। यह व्याख्यान विभाग द्वारा चलाई जा रही व्याख्यान माला के अंतर्गत आयोजित किया गया। विभागाध्यक्ष और भाषा संकाय के डीन प्रो. सुनील ने हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़ के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. बीर पाल सिंह यादव और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा की प्रो. प्रीति सागर का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान-विज्ञान की जड़ें भारतीय संस्कृति और वांडमय में हैं। हिंदी हमारे स्वाभिमान और गर्व की भाषा है। इसने हमें वैश्विक पहचान दी है। प्रो. बीर पाल सिंह यादव ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और हिंदी साहित्य का गहरा संबंध है।

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