70 में से 39 वार्ड आरक्षण से हुए प्रभावित:दिग्गज पार्षदों के वार्ड बदले, कई शिफ्ट होंगे तो कुछ महिला रिश्तेदारों को उतारने की तैयारी में

नगर निगम चुनाव के लिए गुरुवार को हुए आरक्षण ने महापौर और नेता प्रतिपक्ष सहित कई दिग्गज पार्षदों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। सामान्य वार्ड के ओबीसी और महिला आरक्षित होने से उन्हें अब चुनाव लड़ने के लिए दूसरी जमीन तलाशनी पड़ेगी। ऐसे में उन्हें आजू-बाजू के वार्डों में शिफ्ट होना पड़ेगा या फिर परिवार की महिलाओं को मैदान में उतारना पड़ेगा। इनमें कुछ पार्षद तो ऐसे हैं जो पिछले तीन-चार चुनाव से लगातार एक ही वार्ड में जीत हासिल करते हैं। नए आरक्षण कुछ ऐसे दिग्गजों को चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा जो पिछले आरक्षण में फंसने के कारण निगम की राजनीति से दूर हो गए थे। निगम चुनाव के आरक्षण को लेकर पिछले एक हफ्ते से हलचल शुरू हो गई थी। परिसीमन की वजह से ज्यादातर वार्डों में आरक्षण के बाद बदलाव तय माना जा रहा था। ऐसा ही हुआ। हालांकि 70 में 39 वार्ड आरक्षण के कारण प्रभावित हुए हैं। 31 वार्ड प्रभावित नहीं हुए। इनमें लगातार चुनाव लड़ने वालों को फिर दावेदारी का मौका मिलेगा। सुंदर लाल शर्मा वार्ड : चार बार के पार्षद और भाजपा प्रवक्ता मृत्युंजय दुबे का वार्ड सुंदर नगर अनारक्षित महिला हो गया है। उनके पास पत्नी को चुनाव लड़ाने के अलावा आसपास के वार्ड से खुद चुनाव लड़ने का विकल्प है। बंजारी माता वार्ड : कांग्रेस के दिग्गज पार्षद और एमआईसी सदस्य नागभूषण राव यादव का वार्ड बंजारी माता इस बार महिला हो गया। एक बार उनकी पत्नी और लगातार तीन बार वे पार्षद चुने गए हैं। शहीद भगत सिंह वार्ड : इस वार्ड से भाजपा के सुनील चंद्राकर लगातार 4 बार के पार्षद है। इस बार उनका वार्ड अनारक्षित महिला हो गया है। इसलिए उन्हें महिला सदस्य उतारना होगा या दूसरे वार्ड जाना होगा। ठाकुर प्यारेलाल वार्ड : 3 बार के पार्षद रहे एमआईसी सदस्य ज्ञानेश शर्मा का वार्ड इस बार महिला आरक्षित हो गया है। वे खुद चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, लेकिन उनके पास परिवार की महिला सदस्य को उतारने का मौका है। कन्हैया लाल बाजारी वार्ड: 3 बार से भाजपा के पार्षद रहे विनोद अग्रवाल का वार्ड ओबीसी हो गया है। अब उनका लड़ना मुश्किल क्योंकि उनका वार्ड ही नहीं, बल्कि उनके आजू-बाजू के वार्ड भी आरक्षित हो गए है। मदर टेरेसा वार्ड: दो बार के पार्षद अजीत कुकरेजा का वार्ड इस बार ओबीसी आरक्षित हो गया है। उन्हें अब आसपास के वार्ड में शिफ्ट होना पड़ेगा। हालांकि विधानसभा चुनाव में पार्टी से बगावत कर चुके हैं। 15 वार्ड ओबीसी के लिए सुरक्षित 8 वार्ड ओबीसी महिला 6 एससी वार्ड 3 एससी महिला 24 वार्ड सामान्य, यहां से कोई भी लड़ सकेगा चुनाव 11 सामान्य महिला वार्ड मैं महापौर हूं। सभी 70 वार्ड मेरे हैं। मैं किसी भी वार्ड से लड़ सकता हूं। हालांकि यह फैसला करने का अधिकार पार्टी का है। चुनाव लड़ूंगा या नहीं, या फिर मेरी जो भूमिका होगी, वह पार्टी तय करेगी।
– एजाज ढेबर, महापौर रायपुर मेरा वार्ड भले ही महिला ओबीसी आरक्षित हुआ है, लेकिन काम करने वालों के लिए आरक्षण कोई बाधा नहीं। पिछले 15 साल से काम कर रहे हैं। पार्टी जैसा कहेगी, वैसा करेंगे।
– मीनल चौबे, नेता प्रतिपक्ष

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