नगर पालिका तथा नगर निगम संशोधन विधेयक सदन में पास:विरोध में कांग्रेस ने किया सदन का बहिष्कार साव बोले- निर्वाचित बॉडी का कार्यकाल नहीं बढ़ा रहे

विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन गुरूवार को नगर पालिका तथा नगर निगम संशोधन विधेयक विपक्ष की अनुपस्थिति में पास कर दिया गया। प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने ​विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार ​कर दिया। इस मामले में नगरीय प्रशासन मंत्री अरूण साव ने कहा कि हम निर्वाचित बाॅडी का कार्यकाल नहीं बढ़ा रहे हैं बल्कि इसके माध्यम से यह प्रावधान किया गया है कि यदि निर्धारित समय में चुनाव नहीं हो पाए तो आगामी छह माह के भीतर वहां पर चुनाव कराना अनिवार्य होगा। साव ने कहा कि कांग्रेस जिस संशोधन के आधार पर इसमें आपत्ति कर रही है उसमें यह स्पष्ट उल्लेख है कि किसी निर्वाचित बॉडी का कार्यकाल पांच साल से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता। हमारे संशोधन में ऐसा कुछ भी नहीं है। चं​ूकि पंचायत राज अधिनियम में स्पष्ट है कि यदि किसी परिस्थिति में पांच साल के भीतर चुनाव नहीं हो पाया ता​े छह माह के लिए प्रशासन या उसकी व्यवस्था की जाएगी। यह बिल्कुल भी असंवैधानिक नहीं है। … तो हम सदन में नहीं रहेंगे: डॉ. महंत
नेता प्रतिपक्ष डॉ.चरणदास महंत ने कहा हम जो कह रहे हैं उसे मंत्री जी समझ नहीं रहे हैं या समझना नहीं चाहते हैं। आप यहां बड़े विधि विशेषज्ञों को बुला लीजिए। चर्चा हो जाए फि​र प्रस्तुत कर ली​जिए। यदि यहां संविधान के विपरीत चर्चा होगी तो हम सदन में नहीं रह पाएंगे। इसके बाद कांग्रेस ने कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। सड़क निर्माण में गड़बड़ी, चार अफसर सस्पेंड, ठेकेदार से रिकवरी भी करेंगे प्रश्नकाल में दंतेवाड़ा में सड़क में गड़बड़ी के मुद्दे पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा को घेरने की कोशिश की। उन्होंने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। विपक्षी विधायकों ने भी चंद्राकर का समर्थन करते हुए नारेबाजी की। उप मुख्यमंत्री ने इस मामले में चार अफसरों को सस्पेंड करने के साथ ही एक रिटायर अफसर के खिलाफ जांच की घोषणा की। उन्होंने ठेकेदार के खिलाफ रिकवरी और एफआईआर के निर्देश भी दिए। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि ये टेंडर मूल लागत से करीब 10 प्रतिशत ज्यादा का था। सड़क 2.78 करोड़ में बनना था। इसमें से 1.81 करोड़ का भुगतान किया गया है। बड़ी परियोजना वाली जगहों पर नहीं हो पाएगी जमीनों की खरीदी-बिक्री विधानसभा में गुरुवार को पारित छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक में कई नए प्रावधान किए गए हैं। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि इस संशोधन विधेयक में जो सबसे बड़ा सुधार हुआ है उसके मुताबिक केंद्र और राज्य सरकार की बड़ी-बड़ी परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के कारण योजना आगे नहीं बढ़ पाती। इ​सलिए यह प्रावधान किया गया है कि धारा चार के प्रकाशन से पहले, जैसे ही किसी बड़ी परियोजना पर काम करने के लिए केंद्र या राज्य सरकार की ​चिट्टी जारी होगी इसके बाद तत्काल वहां पर जमीन की खरीदी बिक्री पर रोक लग जाएगी। बिल्डिंग स्ट्रक्चर निर्माण में अब 75% पार्किंग पर नियमितीकरण छत्तीसगढ़ में भवनों के नियमितीकरण के लिए नया नियम लागू कर दिया गया है। प्रदेश में ऐसे किसी भी बिल्डिंग स्ट्रक्चर जहां पर पार्किंग के लिए 75 फीसदी जगह होगी उसे ही अब नियमित किया जा सकेगा। कांग्रेस शासनकाल में 25 फीसदी पार्किंग होने पर ही नियमितिकरण किया जा रहा था। इस तरह भाजपा सरकार ने कांग्रेस सरकार के एक और फैसले को पलट दिया है। आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में ​नियम बदलकर पार्किंग व्यवस्था की पूरी तरह धज्जियां उड़ा दी थी। किसी भी बिल्डिंग स्ट्रक्चर में सिर्फ 25 फीसदी पार्किंग होने पर ही उसे नियमित कर दिया जा रहा था। यह अपने चहेतों को उपकृत करने का प्रयास था और इसके कारण शहरों की व्यवस्था चरमरा गई है। इसलिए इसमें संशोधन करते हुए अब 25 फीसदी की बजाय पार्किंग के लिए 75 फीसदी स्थान होना जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि नए नियम के तहत नियमितीकरण बने-बनाए स्ट्रक्चर का ही होगा। इसके बाद उसमें और कोई नया निर्माण नहीं कर पाएगा। उन्होंने बताया कि इस तरह के 23 हजार आवेदन पेंडिंग हैं।

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