बिलासपुर में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और किसान की जमीन पर रास्ता देने के मामले में तहसीलदार का नया कारनामा सामने आया है। तहसीलदार मुकेश देवांगन ने 31 जनवरी को पहले आदेश जारी कर बिल्डर को सात दिन में देने का आदेश दिया। फिर उसी दिन दूसरा आदेश जारी कर दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए जमीन खाली करने का फरमान जारी कर दिया। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि किसान को अपील करने का समय न मिल सके। हालांकि, मामला सामने आने पर कलेक्टर अवनीश शरण ने बिल्डर की जमीन को सरकारी रिकार्ड में दर्ज करने का आदेश दिया है। लेकिन, तहसीलदार यह आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, कोनी के पटवारी हल्का नंबर 46 के खसरा नंबर 1307/1 व खसरा नंबर 1308 के कुल रकबा 0.234 हेक्टेयर की जमीन राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार गेंदराम साहू पिता स्व. दुर्जन साहू व चिरौंजी बाई पति दुर्जन साहू के नाम दर्ज है। किसान की जमीन के पास ही अज्ञेय नगर निवासी सुभाष चंद्र मिश्रा पिता आरएस मिश्रा का खसरा नंबर 1309/3 और 1305/1 की जमीन है। सुभाष चंद्र मिश्रा जय गुरुदेव इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नामक फर्म के संचालक हैं। उन्होंने अपनी जमीन पर रास्ता देने के लिए तहसीलदार के न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया था। तहसीलदार के आदेश अनुसार पटवारी किसान गेंदराम साहू ने अपनी जमीन के अतिरिक्त खसरा नंबर 1309/1 की 0.40 एकड़ सरकारी जमीन पर काबिज है। रिकार्ड के अनुसार यह रास्ते की जमीन है। तहसीलदार ने किसान को खुद से रास्ते की जमीन खाली कराने के निर्देश दिए थे। ऐसा नहीं करने पर बलपूर्वक जमीन खाली करवाने की बात कही थी। पर बिल्डर ने बिना किसान को सूचना दिए रातों रात खड़ी फसल पर मिट्टी पटवा दी। इसके अलावा सरकारी जमीन पर भी मिट्टी पाट कर 40 फीट सड़क बना लिया। कलेक्टर अवनीश शरण ने इस मामले की शिकायत पर एसडीएम मनीष साहू से जांच कराई, तब सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने का मामला सामने आया। तहसीलदार की भूमिका पर उठे सवाल
बिल्डर को फायदा पहुंचाकर सड़क बनाने का आदेश देने के मामले में तहसीलदार मुकेश देवोंगनकी बड़ी भूमिका सामने आई है। बिल्डर को रास्ता देने के लिए उन्होंने किसान को बेदखली आदेश दिया। तहसीलदार ने रास्ता देने के लिए आदेश दिया, यहां तक तो ठीक है। लेकिन, हैरानी वाली बात यह है कि उन्होंने एक ही दिन में दो आदेश जारी कर दिया। पहले आदेश में उन्होंने किसान को 7 दिन में बेजा कब्जा हटाने का निर्देश दिया। जिसके बाद उसी दिन दूसरा आदेश जारी कर दिया। जिसमें किसान को दो दिनों में बेजा कब्जा हटाने का फरमान जारी किया गया। जिसके बाद बिल्डर ने रातों रात किसान की खड़ी फसल और सरकारी जमीन पर कई ट्रक मिट्टी पाट कर सड़क बना लिया। छुट्टी से पहले जारी किया दो आदेश
बिल्डर के पक्ष में आदेश जारी करने वाले तहसीलदार मुकेश देवांगन ने ऐसा इसलिए किया, ताकि किसान को अपली करने का मौका न मिल सके। जिस दिन उन्होंने आदेश जारी किया उसके अगले 2 दिन छुट्टी थी। इसलिए किसान तहसीलदार के आदेश को अपील भी नहीं कर सकता था। यही वजह है कि पहले सात दिन का समय दिया गया था। फिर दूसरे आदेश में महज दो दिन का समय दिया गया। बता दें कि यह आदेश 31 जनवरी शुक्रवार को तहसीलदार मुकेश देवांगन ने जारी किया था। इसके बाद शनिवार और रविवार को अवकाश था। एसडीएम की जांच रिपोर्ट में सरकारी निकला जमीन
एसडीएम मनीष साहू की जांच रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि सेंदरी पटवारी हल्का नंबर 46 स्थित भूमि खसरा नंबर 1309 रकबा 7.57 एकड़ भूमि मिसल बंदोबस्त के अनुसार घास मद में दर्ज है। अधिकार अभिलेख उक्त खसरा के दो बटांकन खसरा नंबर 1309/1 रकबा 4.27 एकड़ रघुवीर सिंह आदि के नाम दर्ज थी। खसरा नंबर 1309/1 रकबा 4.27 एकड़ भूमि चारागाह मद में दर्ज है। ईश्वर पिता कुंजराम ने अपने बयान में शासन से उसे कोई पट्टा नहीं मिला है। भूमि पर वह काबिज था, जिसे उसने राजेश अग्रवाल पिता बजरंग अग्रवाल को पांच लाख रुपए में विक्रय किया था। बाद में राजस्व अफसरों से मिलीभगत कर राजेश अग्रवाल और सुभाष चंद्र मिश्रा ने बिना पट्टे की जमीन को अपने नाम करा लिया। एसडीएम ने अब 4.24 एकड़ जमीन को सरकारी रिकार्ड में दर्ज करने का आदेश दिया है।


