मुकेश कुमार सिंह | जामताड़ा जामताड़ा सदर अस्पताल में आगजनी की घटना के रोकथाम के लिए बेहतर फायर फाइटर की व्यवस्था नहीं है। इसके कारण अगलगी की घटना होने पर जान-माल का नुकसान हो सकता है। सदर अस्पताल में प्रतिदिन 250 से 300 की संख्या में मरीज इलाज कराने आते हैं। जबकि, 50-60 मरीज भारती रहते हैं। आगजनी की बड़ी घटना में छोटे फायर एक्सटिंग्विशर से अस्पताल की सुरक्षा नहीं हो सकती। िस्थति यह है िक सदर अस्पताल में नियुक्त कर्मचारियों को फायर एक्स्टिंिग्वशर चलाने की भी जानकारी नहीं है। जबकि, यहां कई बार शॉर्ट सर्किट के मामले सुने और देखे जाते हैं। जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल में अग्निशमन यंत्र का एनओसी प्राप्त भी नहीं है। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन से जब पूछा गया तो जानकारी मिली की इतने बड़े अस्पताल में 17 फायर एक्सटिंग्विशर है और इसी के भरोसे सदर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था चलाई जा रही है। ऐसे में अगर कभी आगलगी की बड़ी घटना हुई तो अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की जान बचाना भी मुश्किल हो सकता है। अस्पताल में 50 बेड पुरुष वार्ड के और 50 बेड महिला वार्ड के हैं। साथ ही 12 बेड शिशु वार्ड के अलावा सिजेरियन रूम 1, लेबर रूम है। यहां अगलगी की रोकथाम के लिए 6 किलोवाले सिलेंडर के अलावा और कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल के सेकंड फ्लोर पर बेड से अधिक मरीज भर्ती किए जाते हैं। वार्ड के अलावा बाहर के बरामदे में भी बेड लगाया गया है। तीन बार हो चुकी है केबल जलने की घटना वर्ष 2023 में तीन अगलगी की घटनाएं सदर अस्पताल में हुई थीं। इसमें उपाधीक्षक के कार्यालय , दवाखाना के समीप, और ओपीडी हॉल के बरामदे में शॉर्ट-सर्किट से आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। अग्निशमक प्रभारी कमलेश सिंह ने बताया कि सदर अस्पताल में अग्निशामक के िलए सलाह दी गई है। लेकिन, सदर अस्पताल को एनओसी प्राप्त नहीं है। अब राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद ही सदर अस्पताल को एनओसी प्राप्त हो सकेगा।


