श्रमिक लाभार्थियों को स्वीकृत राशि तो नहीं मिल रही, इसी नाम से साइबर अटैक कर ठगी का खेल चल पड़ा

राजनारायण शर्मा | चित्तौड़गढ़ श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं में हजारों लाभार्थी श्रमिकों का भुगतान अटका हुआ है। इसकी वजह अधिकांश उप श्रम आयुक्त का पद खाली होना है पर इसी आड़ में ठग गिरोह सक्रिय हो गया। जो लाभार्थियों को फोन कर इसी नाम पर अपने खातों में रुपए मंगवा रहा है। बदमाश यह कॉल श्रम निरीक्षक बनकर कर रहे। हैरत की बात यह कि वे इन मजदूरों को बाकायदा विभाग में मौजूद उनके आवेदन पत्र सहित उनके बारे में पूरी सटीक अपडेट जानकारी भी भेज रहे हैं। उनके ट्रू कॉलर पर चित्तौड़गढ़ श्रम कार्यालय के इंस्पेक्टर मुकेश बुनकर का नाम आ रहा है और वो इनके नाम से रुपए ट्रांसफर करने के लिए कहते हैं। ताकि मजदूर भरोसा कर ले। दैनिक भास्कर के पास गत दो दिन के ही दो ऐसे पुख्ता उदाहरण है। एक मजदूर 81 हजार रुपए की ठगी का शिकार हो चुका हैं तो दूसरा ठगे जाने से बाल-बाल बचा। मामला सामने आने के बाद ठगी के शिकार व्यक्ति व खुद श्रम निरीक्षक मुकेश बुनकर ने भी पुलिस में रिपोर्ट दी है। भास्कर द्वारा जुटाई जानकारी अनुसार फर्जी श्रम निरीक्षक बनकर ठगी कर रहे व्यक्ति की लोकेशन जोधपुर की आ रही है। निरीक्षक बुनकर ने कहा कि ऐसी शिकायतें लेकर और भी आवेदक आ रहे हैं। इससे आशंका है कि श्रमिकों के कम पढ़े लिखे होने व विभाग में स्वीकृति व भुगतान प्रक्रिया अटकने का फायदा उठाते हुए साइबर ठग सक्रिय हैं। राशि मांगने पर झांसे में न आए और पुलिस को सूचना दें। केस 1 : 4 बार में 81 हजार श्रम निरीक्षक समझकर ठग के खाते में ट्रांसफर करा दिए समीपवर्ती बराड़ा लक्ष्मीपुरा निवासी मदनलाल लोदा की श्रमिक पत्नी पिंकी की मृत्यु होने पर सरकार की एक योजना के तहत 2 लाख की राशि के लिए ओछडी ई मित्र केंद्र से आवेदन किया था। दो दिन पूर्व 17 दिसंबर दोपहर 4 से 5 बजे के बीच उसके मोबाइल पर फोन आया। सामने वाले ने खुद को श्रम अधिकारी मुकेश बुनकर बताते हुए कहा कि आपके 2 लाख रुपए स्वीकृत हो गए हैं। मेरे बताए बैंक खाते में 15 हजार रुपए तुरंत डालो तो उसके खाते में ये दो लाख रुपए तुरंत आ जाएंगे। मदन ने इस बात पर भरोसा कर वाट्सएप पर आए बार कोड पर स्कैन कर15 हजार की राशि डाल दी। दुबारा कहने पर 22 हजार रुपए और डाल दिए। कुछ ही देर बाद फिर फोन आया कि आपके खाते से पेन कार्ड लिंक नहीं होने से ये रुपए आपके बैंक खाते में जमा नहीं हो रहा है। इस कारण आप वापस 22 हजार रुपए डाल दो। मैं इसका संशोधन कर संपूर्ण राशि आपके बैंक खाते में जमा कराता हूं। मदन ने झांसे में आते हुए अपने भाई के खाते से 22-22 हजार रुपए और ट्रांसफर करा दिए। इस तरह उसने कुल 81 हजार रुपए भेज दिए। बाद में पता चला कि उसके साथ ठगी हो गई। केस 2 :मंत्री दक को फोन लगाकर पूछने से ठगी का शिकार होने से बच गया ऊंकार कीर भदेसर क्षेत्र में असावरा पंचायत के चूना का खेडा निवासी ऊंकार कीर के पास भी 18 दिसंबर को श्रम निरीक्षक मुकेश बुनकर के नाम से ही फोन आता है। उससे भी अपने श्रमिक पिता हरलाल की मृत्यु पर योजना में स्वीकृत राशि डालने के लिए 15 हजार रुपए खाते में डालने को कहा गया। भरोसा बनाने के लिए उसके वाट्सएप पर श्रम विभाग में किए गए आवेदन व ताजा स्टेटस का पूरा अपडेट भी आया। इसके बावजूद जागरूक ऊंकार ने संदेह होने पर सीधे विधायक सहकारिता राज्यमंत्री गौतम दक को फोन कर यह बात बताई। मंत्री दक के मना करने व इसकी जांच कराने की बात कहने पर उसने रुपए ट्रांसफर नहीं किए। मंत्री दक ने उसी समय भाजपा के संभाग मीडिया प्रभारी सुधीर जैन को श्रम कार्यालय भेजा। तब वहां बैठे इंस्पेक्टर मुकेश बुनकर ठगी के शिकार हो चुके बराड़ा निवासी श्रमिक की व्यथा ही सुन रहे थे।

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