पांच विभागों के 8 प्रमुख कानूनों के 47 प्रावधानों के तहत थूकने, धूम्रपान करने, गंदगी फैलाने, नाली पर कब्जा करने, पेड़ काटने या कब्जा करने जैसे कई मामलों में अब जुर्माना या दंड लगाने के बजाय पेनल्टी की कार्रवाई की जाएगी। इससे न केवल कोर्ट का समय बचेगा, बल्कि सरकारी विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों को जेल जाने का भय भी नहीं होगा। अवैध हड़ताल या काम रोकने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकेगी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग की अवधारणा को साकार करने वाला ‘मप्र जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक’ गुरुवार को विधानसभा में पारित हो गया। इस नए विधेयक के तहत, निकायों के मुख्य नगर अधिकारियों (सीएमओ) को भी कब्जाधारियों पर कार्रवाई करने का अधिकार मिलेगा। इससे निवेशकों और व्यापारियों को कार्य के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध होगा। साथ ही, आम जनता को कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार का मानना है कि इससे अदालतों पर अनावश्यक मामलों का बोझ कम होगा और नागरिकों तथा व्यवसायियों को उत्पीड़न से राहत मिलेगी। जन विश्वास विधेयक में कुल 64 प्रावधान शामिल किए गए हैं। इनमें से चार को समाप्त कर दिया गया है। शेष 13 प्रावधानों में कंपाउंडिंग (समझौता) की व्यवस्था लागू होगी। केंद्र सरकार ने जन विश्वास कानून 2023 में लागू किया था, और उसी के अनुरूप मप्र ने भी विभिन्न अधिनियमों के प्रावधानों को सरल बनाया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत आने वाले नगर पालिका निगम अधिनियम 1956 के 16 प्रावधानों और नगर पालिका अधिनियम 1961 के 27 प्रावधानों में पेनल्टी की व्यवस्था लागू की गई है, जो सबसे अधिक है। मप्र औद्योगिक संबंध अधिनियम 1960 के प्रावधानों में अवैध हड़ताल, अवैध कार्यरोध, तालाबंदियों या बंदियों को उकसाने, गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करने जैसे मामलों पर भी नए सिरे से प्रावधानों को सरल किया गया है। हम तो पोस्टर भी नहीं लगा पाएंगे : विपक्ष जन विश्वास बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक व पूर्व मंत्री ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि कार्यकर्ता पोस्टर लगाते हैं, दीवारों पर लिखते हैं। पैनल्टी बढ़ने से वे कैसे काम करेंगे? वे तो हमारे लिए पोस्टर लगाते हैं। फूल सिंह बरैया और राजेंद्र मंडलोई ने भी कहा कि अफसर मनमानी करेंगे और सख्ती बढ़ेगी। जनता से जुड़े वो प्रावधान जिनमें अब पैनल्टी लगेगी


