बीएनएस में एक भी ​FIR नहीं:6 महीने बाद भी ईओडब्ल्यू को नहीं मिले बीएनएस की धारा में FIR के अधिकार, पुराने मामलों में आईपीसी की धाराओं में ही कार्रवाई

एक जुलाई से देशभर में लागू हुई नई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं में कार्रवाई के अधिकार 6 महीने बाद भी मप्र ईओडब्ल्यू को नहीं मिले हैं। एक जुलाई से पहले तक ईओडब्ल्यू भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की 51 धाराओं में कार्रवाई करती रही है। बीएनएस की धाराओं को ईओडब्ल्यू के लिए अधिसूचित करने का प्रस्ताव फिलहाल शासन के पास लंबित है। नई धाराएं अधिसूचित न हो पाने के कारण जांच एजेंसी 6 महीने बाद भी मप्र में बीएनएस के तहत एक भी अपराध दर्ज नहीं कर पाई है। एक जुलाई के बाद जांच एजेंसी ने 5 एफआईआर दर्ज तो कीं, लेकिन सभी की जांच बीएनएस लागू होने के पहले से चल रही थीं। इसलिए ये एफआईआर आईपीसी की धाराओं के तहत ही दर्ज की गई हैं। सजा के प्रावधान में भी बदलाव हुए… ईओडब्ल्यू को मप्र में वर्ष 1977 में सीआईडी शाखा से अलग कर अलग संस्था के रूप में स्थापित किया गया था। मई 1977 में ईओडब्ल्यू के लिए शासन ने 47 धाराएं अधिसूचित कीं। इसके बाद सितंबर 1984 में नई अधिसूचना के बाद इन 47 में 4 धाराएं और जोड़ी गईं। तभी से जांच एजेंसी आईपीसी की इन धाराओं के साथ-साथ अन्य अधिनियमों के तहत कार्रवाई करती आ रही है। 1 जुलाई से आईपीसी को बदलकर बीएनएस लागू हुआ तो पुरानी धाराएं बदली गईं, साथ ही कुछ में सजा के प्रावधान भी बदले। बीएनएस के लागू होने के बाद भी ईओडब्ल्यू के लिए अधिसूचना जारी नहीं हुई है। इन धाराओं के तहत ही कार्रवाई करती रही है ईओडब्ल्यू… आईपीसी-1860 की धारा 120-बी, 124, 124-ए, 153-बी, 161, 162, 163, 164, 165, 165-ए, 167, 186, 212, 213, 218, 295, 295-ए, 296, 297, 298, 330, 331, 332, 333, 353, 406, 407, 408, 409, 411, 419, 420, 429, 431, 436, 467, 468, 469, 471, 472, 473, 474, 475, 476, 477, 477-ए, 489-ए, 489-बी, 489-सी, 489-डी और 505 लोकायुक्त के लिए बीएनएस जरूरी नहीं लोकायुक्त पुलिस को कार्रवाई के लिए बीएनएस की जरूरत नहीं पड़ती। क्योंकि लोकायुक्त पुलिस भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में ही कार्रवाई करती है। और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में कोई बदलाव नहीं हुए हैं। इसके अलावा लोकायुक्त पुलिस को अन्य एक्ट के तहत भी कार्रवाई के अधिकार हैं।

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